June 15, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 091 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्यानबेवाँ अध्याय देवार्चन की महिमा तथा विविध मन्त्र एवं मण्डल का कथन विविधमन्त्रादिकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अभिषेक हो जाने पर दीक्षित पुरुष शिव, विष्णु तथा सूर्य आदि देवताओं का पूजन करे। जो शङ्ख, भेरी आदि वाद्यों की ध्वनि के साथ देवताओं को पञ्चगव्य से स्नान कराता है, वह अपने कुल का उद्धार करके स्वयं भी देवलोक को जाता है। अग्निनन्दन ! कोटि सहस्र वर्षों में जो पाप उपार्जित किया गया है, वह सब देवताओं को घी का अभ्यङ्ग लगाने से भस्म हो जाता है। एक आढ़क घी आदि देवताओं को नहलाकर मनुष्य देवता हो जाता है ॥ १-३ ॥’ चन्दन का अनुलेप लगाकर गन्ध आदि से देवपूजन करे तो उसका भी वही फल है। थोड़े से आयास के द्वारा स्तुति पढ़कर यदि सदा देवताओं की स्तुति की जाय तो वे भूत और भविष्य का ज्ञान, मन्त्रज्ञान, भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले होते हैं ॥ ४१/२ ॥ यदि कोई मन्त्र के शुभाशुभ फल के विषय में प्रश्न करे तो प्रश्नकर्ता के संक्षिप्त प्रश्नवाक्य के अक्षरों की संख्या गिन ले। उस संख्या में दो से भाग दे। एक बचे तो शुभ और शून्य या दो बचे तो अशुभ फल जाने। तीन से भाग देने पर मूल धातुरूप जीव का परिचय मिलता है, अर्थात् एक शेष रहे तो वातजीव, दो शेष रहे तो पित्तजीव और तीन शेष रहे तो कफजीव जाने। चार से भाग देने पर ब्राह्मणादि वर्ण- बुद्धि होती है। तात्पर्य यह कि एक बाकी बचे तो उस मन्त्र में ब्राह्मण-बुद्धि, दो बचने पर क्षत्रिय बुद्धि, तीन बचने पर वैश्य- बुद्धि और चार शेष रहने पर शूद्र-बुद्धि करे। पाँच से भाग देने पर शेष के अनुसार भूततत्त्व आदि का बोध होता है, अर्थात् एक आदि शेष रहने पर पृथिवी आदि तत्त्व का परिचय मिलता है। इसी प्रकार जय-पराजय आदि का ज्ञान प्राप्त करे ॥ ५-६ ॥ यदि मन्त्र–पद के अन्त में एक त्रिक (तीन बीजाक्षर) हों, अधिक बीजाक्षर हों अथवा दो प, म एवं क हो तो इनमें से प्रथम वर्ग अशुभ, बीचवाला मध्यम तथा अन्तिम वर्ग शुभ है। यदि अन्त में संख्या-समूह हो तो वह जीवनकाल के दस वर्ष का सूचक है। यदि दस की संख्या हो तो दस वर्ष के पश्चात् उस मन्त्र के साधक पर यमराज का निश्चय ही आक्रमण हो सकता है ॥ ७१/२ ॥ सूर्य, गणपति, शिव, दुर्गा, लक्ष्मी तथा श्रीविष्णु भगवान् के मन्त्रों के अक्षरों द्वारा जप में तत्पर कठिनी (अङ्गुष्ठ अँगुली) से स्पर्श किये गये कमलपत्र में गोमूत्राकार रेखा पर एक त्रिक से आरम्भ कर बारह त्रिक- पर्यन्त लिखे। अर्थात् उक्त मन्त्रों के तीन-तीन अक्षरों का समुदाय एक से लेकर बारह स्थानों तक पृथक् पृथक् लिखे। इसी प्रकार चौंसठ कोष्ठों का एक मण्डल बनाकर उसमें मरुत् (यं), व्योम (हं) और मरुत् (यं) – इन तीन बीजों का त्रिक पहले कोष्ठ से लेकर आठवें कोष्ठ तक लिखे। इन सब स्थानों पर पासा फेंकने से अथवा स्पर्श करने पर शुभाशुभ का परिज्ञान होता है। विषम संख्यावाले स्थानों पर पासा पड़े या स्पर्श हो तो शुभ और सम संख्या पर पड़े तो अशुभ फल होता है ॥ ८-१० ॥ ‘यं हं यं’ – इन तीन बीजों के आठ त्रिक हैं। वे ध्वज आदि आठ आयों के प्रतीक हैं। इन आयों में जो सम हैं, वे अशुभ हैं। विषम आय शुभप्रद कहे गये हैं ॥ ११ ॥ ‘क’ आदि अक्षरों को सोलह स्वरों से तथा सोलह स्वरों को ‘क’ आदि से युक्त करके उन ‘सबके साथ ‘ आं ई’ यह पल्लव लगा दे। पल्लवयुक्त इन सस्वर कादि अक्षरों को आदि में रखकर उनके साथ त्रिपुरा के नाम मन्त्र को पृथक् पृथक् सम्बद्ध करे। उनके आदि में ‘ॐ ह्रीं’ जोड़े और अन्त में ‘नमः’ पद लगा दे। इस प्रकार पूजनकर्म के उपयोग में आनेवाले इन मन्त्रों का प्रस्तार बीस हजार एक सौ साठ की संख्या तक पहुँच जाता है ॥ १२-१३ ॥ ‘आं ह्रीं’ – इन बीजों से युक्त सरस्वती, चण्डी, गौरी तथा दुर्गा के मन्त्र हैं। श्रीदेवी के मन्त्र ‘आं श्रीं’ इन बीजों से युक्त हैं। सूर्य के मन्त्र ‘आं क्षौं ‘ इन बीजों से, शिव के मन्त्र ‘आं हौं’ इन बीजों से, गणेश के मन्त्र ‘आं गं’ इन बीजों से तथा श्रीहरि के मन्त्र ‘आं अं’ इन बीजों से युक्त हैं। कादि व्यञ्जन अक्षरों तथा अकारादि सोलह स्वरों को मिलाकर इक्यावन होते हैं। इस प्रकार सस्वर कादि अक्षरों को आदि में और सस्वर ‘क्ष’ से लेकर ‘क’ तक के अक्षरों को अन्त में रखने से सम्पूर्ण मन्त्र बनते हैं ॥ १४-१६ ॥ १४४० सम्पूर्ण मण्डल होने से सूर्य, शिव, देवी दुर्गा तथा विष्णु में से प्रत्येक के तीन सौ साठ मण्डल होते हैं। अभिषिक्त गुरु इन सब मन्त्रों तथा देवताओं का जप ध्यान करे तथा शिष्य एवं पुत्र को दीक्षा भी दे ॥ १७ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘नाना-मन्त्र आदि का कथन’ नामक इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ९१ ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe