July 7, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 246 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छियालीसवाँ अध्याय रत्न-परीक्षण रत्नपरीक्षाः अग्निदेव कहते हैं — द्विजश्रेष्ठ वसिष्ठ ! अब मैं रत्नों के लक्षणों का वर्णन करता हूँ। राजाओं को ये रत्न धारण करने चाहिये — वज्र (हीरा), मरकत, पद्मराग, मुक्ता, महानील, इन्द्रनील, वैदूर्य, गन्धसस्य, चन्द्रकान्त, सूर्यकान्त, स्फटिक, पुलक, कर्केतन, पुष्पराग, ज्योतीरस, राजपट्ट, राजमय, शुभसौगन्धिक, गञ्ज, शङ्ख, ब्रह्ममय, गोमेद, रुधिराक्ष, भल्लातक, धूली, मरकत, तुष्यक, सीस, पीलु, प्रवाल, गिरिवज्र, भुजङ्गमणि, वज्रमणि, टिट्टिभ, भ्रामर और उत्पल ॥ १-६ ॥’ श्री एवं विजय की प्राप्ति के लिये पूर्वोक्त रत्नों को सुवर्णमण्डित कराके धारण करना चाहिये। जो अन्तर्भाग प्रभायुक्त, निर्मल एवं सुसंस्थान हों, उन रत्नों को ही धारण करना चाहिये। प्रभाहीन, मलिन, खण्डित और किरकिरी से युक्त रत्नों को धारण न करे। सभी रत्नों में हीरा धारण करना श्रेष्ठ है। जो हीरा जल में तैर सके, अभेद्य हो, षट्कोण हो, इन्द्रधनुष के समान निर्मल प्रभा से युक्त हो, हल्का तथा सूर्य के समान तेजस्वी हो अथवा तोते के पङ्खों के समान वर्णवाला हो, स्निग्ध, कान्तिमान् तथा विभक्त हो, वह शुभ माना गया है। मरकतमणि सुवर्ण- चूर्ण के समान सूक्ष्म बिन्दुओं से विभूषित होने पर श्रेष्ठ बतलायी गयी है ॥ ७-१० ॥ स्फटिक और पद्मराग अरुणिमा से युक्त तथा अत्यन्त निर्मल होने पर उत्तम कहे जाते हैं। मोती शुक्ति से उत्पन्न होते हैं, किंतु शङ्ख से बने मोती उनकी अपेक्षा निर्मल एवं उत्कृष्ट होते हैं। ऋषि प्रवर! हाथी के दाँत और कुम्भस्थल से उत्पन्न, सूकर, मत्स्य और वेणुनाग से उत्पन्न एवं मेघों द्वारा उत्पन्न मोती अत्यन्त श्रेष्ठ होते हैं। मौक्तिक में वृत्तत्व (गोलाई), शुक्लता, स्वच्छता एवं महत्ता – ये गुण होते हैं। उत्तम इन्द्रनीलमणि दुग्ध में रखने पर अत्यधिक प्रकाशित एवं सुशोभित होती है। जो रत्न अपने प्रभाव से सबको रञ्जित करता है, उसे अमूल्य समझे। नील एवं रक्त आभावाला वैदूर्य श्रेष्ठ होता है। यह हार में पिरोने योग्य है ॥ ११-१५ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘रत्न- परीक्षा कथन’ नामक दो सौ छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २४६ ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe