July 16, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 305 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पाँचवाँ अध्याय पचपन विष्णुनाम पञ्चपञ्चाशद्विष्णुनामानि अग्निदेव कहते हैं — मुने। जो मनुष्य भगवान् विष्णु के निम्नाङ्कित पचपन नामों का जप करता है, वह मन्त्रजप आदि के फल का भागी होता है तथा तीर्थों में पूजनादि के अक्षय पुण्य को प्राप्त करता है। पुष्कर में पुण्डरीकाक्ष, गया में गदाधर, चित्रकूट में राघव, प्रभास में दैत्यसूदन, जयन्ती में जय, हस्तिनापुर में जयन्त, वर्धमान में वाराह, काश्मीर में चक्रपाणि, कुब्जाभ (या कुब्जास्त्र) में जनार्दन, मथुरा में केशवदेव, कुब्जाम्रक में हृषीकेश, गङ्गाद्वार में जटाधर, शालग्राम में महायोग, गोवर्धनगिरि पर हरि, पिण्डारक में चतुर्बाहु, शङ्खोद्धार में शब्बी, कुरुक्षेत्र में वामन, यमुना में त्रिविक्रम, शोणतीर्थ में विश्वेश्वर, पूर्वसागर में कपिल, महासागर में विष्णु, गङ्गासागर-सङ्गम में वनमाल, किष्किन्धा में रैवतकदेव, काशीतट में महायोग, विरजा में रिपुंजय, विशाखयूप में अजित, नेपाल में लोकभावन, द्वारका में कृष्ण, मन्दराचल में मधुसूदन, लोकाकुल में रिपुहर, शालग्राम में हरि का स्मरण करे ॥ १-९ ॥ ‘ पुरुषवट में पुरुष, विमलतीर्थ में जगत्प्रभु, सैन्धवारण्य में अनन्त, दण्डकारण्य में शार्ङ्गधारी, उत्पलावर्तक में शौरि, नर्मदा में श्रीपति, रैवतकगिरि पर दामोदर, नन्दा में जलशायी, सिन्धुसागर में गोपीश्वर, माहेन्द्रतीर्थ में अच्युत, सह्याद्रि पर देवदेवेश्वर, मागधवन में वैकुण्ठ, विन्ध्यगिरि पर सर्वपापहारी, औण्ड्र में पुरुषोत्तम और हृदय में आत्मा विराजमान हैं। ये अपने नाम का जप करने वाले साधकों को भोग तथा मोक्ष देने वाले हैं, ऐसा जानो ॥ १०-१३ ॥ प्रत्येक वटवृक्ष पर कुबेर का, प्रत्येक चौराहे पर शिव का, प्रत्येक पर्वत पर राम का तथा सर्वत्र मधुसूदन का स्मरण करे। धरती और आकाश में नर का, वसिष्ठतीर्थ में गरुडध्वज का तथा सर्वत्र भगवान् वासुदेव का स्मरण करने वाला पुरुष भोग एवं मोक्ष का भागी होता है। भगवान् विष्णु के इन नामों का जप करके मनुष्य सब कुछ पा सकता है। उपर्युक्त क्षेत्र में जो जप, श्राद्ध, दान और तर्पण किया जाता है, वह सब कोटिगुना हो जाता है। जिसकी वहाँ मृत्यु होती है, वह ब्रह्मस्वरूप हो जाता है। जो इस प्रसंग को पढ़ेगा अथवा सुनेगा, वह शुद्ध होकर स्वर्ग (वैकुण्ठधाम) को प्राप्त होगा ॥ १४-१७ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘विष्णु के पचपन नामविषयक तीन सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ३०५ ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe