सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र
मन्त्र :-
“ॐ गुरू जी गनेपाइयाँ, रिद्धि-सिद्धि आइयाँ । रिद्धि-सिद्धि भरै भण्डार, कमी कछू की नाहीं । पीर-पैगम्बर औलिया- सबको राह बताई । हाथा तो हनुमन्त बसे, भैरो बसे कपाल । दो नैनन बिच, नाहर सिंह, मोह लीन संसार । बिन्द्रा लाव, सिन्दूर का सोहै माँग लिलार । बज्र लंगोटा, जङ्गल बासा, भूत – प्रेत नहीं आवे पासा । चार जोगी चौबीस पीर, रक्षा करै बावल्दा बीर । हाथन के हथेली बाँधो, नैनन के बाँधो जोत । बाँध-बाँधू कर करौ उ गुलाम, बैरी दुश्मन करै प्रणाम । राजा-प्रजा लागै पाँव, तहाँ बनै गनेश जी की तालियाँ ।”

ganesh with ridhi sidhiविधि-उक्त मन्त्र से लक्ष्मण-रेखा की भाँति अचूक रक्षा होती है । सिद्ध पर्व-काल में १००८ बार मन्त्र जप कर हवन करने से मन्त्र सिद्ध हो जाता है ।

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