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सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र
मन्त्र :- (१) “ॐ गुरू जी काल-भैरव ! काली लट हाथ, फरसी साथ, नगरी करहुँ प्रवेश । नगरी की करो बकरी । राजा को करो बिलाई । जो कोई मेरा जोग भङ्ग करै, बाबा कृष्णनाथ की दुहाई ।”

vadicjagatविधि – किसी ग्राम या नगर में किसी विशिष्ट काम से जाएँ, तो उस नगर या गाँव में प्रवेश करते ही ७ बार उक्त मन्त्र को पढ़कर फूँक मार कर प्रवेश करें । सभी काम अवश्य पूर्ण होंगे । प्रयोग करने से पूर्व मन्त्र को होली, दीवाली, मङ्गल या अमावास्या को १००८ बार जप कर, हवन कर, सिद्ध कर लेना आवश्यक है ।

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