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आनन्द आदि योगों का ज्ञान एवं फल

देखने की विधि इस प्रकार है – रविवार को यदि अश्विनी नक्षत्र है तो “आनन्द योग” इसी प्रकार भरणी नक्षत्र है तो “काल दण्ड योग” होगा – तदनुसार शेष वार व नक्षत्र के योग और उनके फल जाने जा सकते हैं । विशेष- इन योगों के निर्धारण हेतु अभिजित नक्षत्र को भी सम्मिलित किया जाता है।

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