ग्राम-मोहन-मन्त्र –
मन्त्रः- ”जल – जल – जीवन – दाता जल । जल के राजा कूप, जहाँ बसे वरुण भूप ।। दोहाई कामाख्या की, मोहनी चला दे । भूप को फँसा कूप में, माया फैला दे ।। तेरी महिमा महान, रख ले सतगुरु की आन ।। ॐ नमः कामाक्षाय अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”

विधि : शुक्ला एकादशी की अर्द्ध-रात्रि में किसी कुएँ के पास सवा सेर शक्कर (चीनी) लेकर जाए और पूर्व की ओर मुख कर उल्लू के पङ्ख पर पाँव रखकर बैठे । १०८ बार उक्त मन्त्र पढ़ कर शक्कर को कुएँ में डाल दे । जितने नर-नारी उस कुएँ का जल पिएंगे, सभी जप – कर्ता पर मोहित होकर उसकी आज्ञा से प्राण तक देने के लिए सदा तैयार रहेंगे ।durga

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