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छत्तीसगढ़ के अनुभूत शाबर मन्त्र


प्रस्तुत शाबर मन्त्र अनुभूत हैं और अल्प मात्रा में जपने पर ही सिद्ध हो जाते हैं । इन मन्त्रों को सिद्ध करने के लिए नव-रात्रि, दीपा-वली, होली, ग्रहण, अमावस्या आदि पर्व उपयुक्त माने गए हैं । इन मन्त्रों को सिद्ध करने के पहले ‘गुरु – सर्वार्थ साधन मन्त्र’ और ‘शरीर- रक्षा मन्त्र’ को जप लेना चाहिए, तभी इनमें सफलता मिलती है । यहाँ पर केवल ‘गुरु-स्थापना-मन्त्र’ और ‘शरीर-रक्षा-मन्त्र’ प्रस्तुत हैं, जो छत्तीसगढ़ में प्रचलित हैं । यथा-

गुरु-स्थापना-मन्त्र :- साधना प्रारम्भ के पहले एक पाँच बत्ती- वाला दीपक जला कर निम्न मन्त्र को सात बार पढ़ें –

“गुरू दिन गुरू बाती, गुरू सहे सारी राती ।
वासतीक दीवना बार के, गुरू के उतारौं आरती ।।”

शरीर-रक्षा-मन्त्र :-

“ॐ नमो आदेश शुरू का । जय हनुमान, वीर महान । मै करथ हौं तोला प्रनाम, भूत-प्रेत-मरी मसान । भाग जाय, तोर सुन के नाम । मोर शरीर के रक्ष्या करिबे, नहीं तो सीता मैया के सय्या पर पग ला धरबे ! मोर फूकें । मोर गुरू के फूकें, गुरू कौन ? गौरा- महा-देव के फूकें । जा रे शरीर बँधा जा ।”

विधि – उक्त मन्त्र को ग्यारह बार पढ़कर, अपने चारों ओर एक गोल घेरा बना लें । इससे साधना में सभी विघ्नों से साधक की रक्षा होती है।

टोना झारने के मन्त्र
टोना लगाने का मन्त्र
भूत-प्रेत बाँधने के मन्त्र
बैरी-नाशन मन्त्र
शत्रु-स्तम्भन मन्त्र
शत्रु-पीड़ा-कारक मन्त्र
गर्भ-स्तम्भन मन्त्र

 

 

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