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दीन-दयालु दिवाकर देवा
दीन-दयालु दिवाकर देवा ।
कर मुनि, मनुज, सुरासुर सेवा ।।
हिम-तम-करि-केहरि करमाली ।
दहन दोष-दुख-दुरित-रुजाली ।।

vadicjagat

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कोक-कोकनद-लोक-प्रकासी ।
तेज-प्रताप-रुप-रस-रासी ।।
सारथि-पंगु, दिव्य रथ-गामी ।
हरि-संकर-बिधि-मूरति स्वामी ।।
बेद-पुरान प्रगट जस जागै ।
तुलसी राम-भगति बर माँगै ।।
दीन-दयालु दिवाकर देवा ।
कर मुनि, मनुज, सुरासुर सेवा ।।

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