नारी-मोहन मन्त्र  –
मन्त्रः- ”आ चन्दा की चांदनी, होकर उन्मादिनी । सतगुरु की है पुकार । मान-मान मानिनी ।। तुझे कामाक्षा की आन, छोड़ हठ: चीर घटा-पट । आ जा नदी के किनार, गा ले प्रीति रागिनी ।। ॐ नमः कामा-क्षाय अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”

विधि : किसी पूर्णिमा की रात को नदी के किनारे, एकान्त स्थान में पूर्व की ओर मुख करके आसन पर बैठे । १०८ बार उक्त मन्त्र पढकर एक फूल नदी में डाल दे । इस क्रिया से यह मन्त्र सिद्ध हो जाएगा । फिर जब चाहे, इस मन्त्र से अभिमन्त्रित फूल या रूमाल आदि कोई भी सुहावनी वस्तु, किसी भी युक्ति से, साध्या के हाथ में दे । साध्या मोहित होकर उसकी आज्ञानुवर्तिनी बन जायगी ।durga

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