भगवान् श्रीकृष्ण के दर्शन के लिये लौकिक सरल अनुष्ठान

(१)
कच्चित्तुलसि कल्याणि गोविन्दचरणप्रिये ।
सह त्वालिकुलैर्बिभ्रद् दृष्टस्तेऽतिप्रियोऽच्युतः ॥

(श्रीमद्भागवत १० । ३०। ७)

इस मन्त्र को बिल्वकाष्ठ की छोटी-सी पीठिका (चौकी) बनवाकर तुलसीकाष्ठ की ही कलम से लिखकर रोज षोडशोपचारसे पूजन करे और कम-से-कम ३२००० जप-संख्या पूरी करे । ब्रह्मचर्य का अखण्ड पालन करे और सत्य का आचरण करे ।

(२)
व्रजवनौकसां व्यक्तिरङ्ग ते वृजिनहन्त्र्यलं विश्वमङ्गलम् ।
त्यज मनाक् च नस्त्वत्स्पृहात्मनां स्वजनहृद्रुजां यन्निषूदनम् ॥

(श्रीमद्भागवत १० । ३१ । १८)
इस मन्त्र की एक माला का जप करके ‘ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः’ मन्त्र की ११ माला का प्रतिदिन जप करे । ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक है ।

(३)
तासामाविरभूच्छौरिः स्मयमानमुखाम्बुजः ।
पीताम्बरधरः स्रग्वी साक्षान्मन्मथमन्मथः ॥

(श्रीमद्भागवत १० । ३२ । २)
इस मन्त्र की एक माला का जप करके ‘ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा’- इस मन्त्र की कम-से-कम ११ मालाओं का जप प्रतिदिन शुद्ध होकर करे ।

 

 

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