भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७७
ॐ श्रीपरमात्मने नमः
श्रीगणेशाय नमः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भविष्यपुराण
(उत्तरपर्व)
अध्याय ७७
सम्प्राप्ति-द्वादशी व्रत

भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — पौष मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी से ज्येष्ठ मास की द्वादशी तक प्रत्येक मास की कृष्ण द्वादशी को षाण्मासिक सम्प्राप्ति-द्वादशी-व्रत किया जाता है । प्रत्येक मास में क्रमशः पुण्डरीकाक्ष, माधव, विश्वरूप, पुरुषोत्तम, अच्युत तथा जय — इन नामों से उपवासपूर्वक भगवान् की पूजा करनी चाहिये । पुनः आषाढ़ कृष्ण द्वादशी से व्रत ग्रहणकर मार्गशीर्ष तक व्रत का नियम लेना चाहिये । om, ॐपूर्वविधान से उपवासपूर्वक उन्हीं नामों से क्रमशः भगवान् का पूजन करना चाहिये । प्रतिमास ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा देनी चाहिये । तेल एवं क्षार पदार्थ नहीं ग्रहण करने चाहिये । इस प्रकार एक वर्ष तक इस व्रत के करने से सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं और अन्त में वह भगवान् के अनुग्रह से उनके लोक को प्राप्त कर लेता है ।
(अध्याय ७७)

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