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भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय  – अध्याय ९ से ११
ॐ श्रीपरमात्मने नमः
श्रीगणेशाय नमः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भविष्यपुराण
(मध्यमपर्व — तृतीय भाग)
अध्याय – ९ से ११
वट, बिल्व तथा पूगीफल आदि वृक्ष-युक्त उद्यान की प्रतिष्ठा-विधि

सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! वट वृक्ष की प्रतिष्ठा में वृक्ष के दक्षिण दिशा में उसकी जड़ के पास तीन हाथ की एक वेदी बनाये और उसपर तीन कलश स्थापित करे । उन कलशों पर क्रमशः गणेश, शिव तथा विष्णु की पूजा कर चरु से होम करे । वट-वृक्ष को त्रिगुणित रक्त सूत्रों से आवेष्टित करे । बलि में यव-क्षीर प्रदान करे और यूपस्तम्भ आरोपित करे । om, ॐवट वृक्ष के मूल में यक्ष, नाग, गन्धर्व, सिद्ध और मरुद्गणों की पूजा करे । इस प्रकार सम्पूर्ण क्रियाएँ विधि के अनुसार पूर्ण करे ।
बिल्ववृक्ष की प्रतिष्ठा में पहले दिन वृक्ष का अधिवासन करे । ‘त्र्यम्बकं० ‘ (यजु० ३ । ६०) इस मन्त्र से वृक्ष को पवित्र स्थान पर स्थापित कर ‘सुनावमा० ‘ (यजु० २१ । ७) इस मन्त्र से गन्धोदक द्वारा उसे स्नान कराये । ‘मे गृह्णामि० ‘ इस मन्त्र से वृक्ष पर अक्षत चढ़ाये । ‘कया नश्चित्र० ‘ (यजु० २७ । ३९) इस मन्त्र से धूप, वस्त्र तथा माला चढ़ाये । तदनन्तर रुद्र, विष्णु, दुर्गा और धनेश्वर — कुबेर का पूजन करे । दूसरे दिन प्रातःकाल उठकर शास्त्रानुसार नित्यक्रिया से निवृत्त होकर घर में सात ब्राह्मण-दम्पति को भोजन कराये । फिर बिल्व के मूल-प्रदेश में दो हाथ की वर्तुलाकार वेदी का निर्माण करे । उसको गेरु तथा सुन्दर पुष्प-चूर्णादि से रञ्जित कर उस पर अष्टदल कमल की रचना करे । वृक्ष को लाल सूत्र से पाँच, सात या नौ बार वेष्टित करे । वृक्ष-मूल में उत्तराभिमुख होकर व्रीहि रोपे तथा शिव, विष्णु, ब्रह्मा, गणेश, शेष, अनन्त, इन्द्र, वनपाल, सोम, सूर्य तथा पृथ्वी — इनका क्रमशः पूजन करे । तिल और अक्षत से हवन करे तथा घी एवं भात का नैवेद्य दे । यक्षों के लिये उड़द और भात का भोग लगाये । ग्रहों की तुष्टि के लिये बाँस के पात्र पर नैवेद्य दे । बिल्व-वृक्ष को दक्षिण दिशा से दूध की धारा प्रदान करे । यूप का आरोपण करे, वृक्ष का कर्णवेध-संस्कार करे और भगवान् सूर्य को अर्घ्य प्रदान करे ।यदि सौ हाथ की लम्बाई-चौड़ाई का उद्यान हो, जिसमें सुपारी या आम्र आदि के फलदायक वृक्ष लगे हों तो ऐसे उद्यान की प्रतिष्ठा वास्तुमण्डल की रचनाकर वास्तु आदि देवताओं का पूजन करके यजन-कर्म करे । विशेषरूप से विष्णु एवं प्रजापति आदि देवताओं का पूजन करे । हवन के अन्त में ब्राह्मणों को दक्षिणा दे ।
(अध्याय ९-११)

See Also :-

1.  भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय २१६
2. भविष्यपुराण – मध्यमपर्व प्रथम – अध्याय १९ से २१
3. भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १९ से २१

4. भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय  – अध्याय १
5. भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय  – अध्याय २ से ३
6. भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ४ से ८

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