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भूत-प्रेत-नाशक श्री हनुमान् जी का ‘झाड़ा’-मन्त्र
मन्त्रः-
“जयति हनुमान जी, नित ध्यान धरुँ ।
सेऊँ वीर हनुमान, जटा-जूट अवधुत जंग जञ्जीर ।।
लँगोट गाढ़ा भूत को बस कर, प्रेत को बसकर, गदा की मार से,
तेल-सिन्दूर फल-फूल पान मंगल चढ़े, आप देखें जब रोट होवे ।
सत्य की नाव नरसिंह खेवे, दुष्ट के लात बजरंग देवे ।।
तोड़ वज्र किवाड़ वक्त की कड़ी ।
चार लाख अस्सी हजार बस कर, रावण के दीनी धड़ा-धड़ी ।।
सत्य-वीर हनुमान, बरस बारह के जवान,
हाथ में लड्डू – मुख में पान ।
सीता को खोजन गए, तो मो-से पतित अनाथ की नहीं करोगे का महाराज ?
हनुमन्ता गुणवन्ता गाजन्ता घोरन्ता, डगरी बैठ राज करन्ता ।
ऋद्धि लाओ, सिद्धि लाओ, राजा-परजा बस कर, बड़ी वेग मेरे पास लाओ । मेरे पास बड़ी वेग नहीं लाओगे, तौ माता अञ्जनी का दूध पिया, हलाल से हराम कराओगे । बड़ी बार वेग लाओगे, तो माता अञ्जनी का दूध पिया हल्लाल करोगे । यही पान का बीड़ा, तुम्हारी भैंट है । जो वाचा चूके, तो ऊभ्यौरी सूखे । मेरे हँकारे नहीं हँकौगे, तो माता अञ्जनी की दुहाई, नरसिंह पिता की दुहाई, आदि-पुरुष की दुहाई, सती सीता की दुहाई । देखूँ हनुमन्ता वीर ! तेरी शक्ति, मेरी भक्ति, फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ।”

विधिः-
मंगलवार से मंगलवार तक हनुमान जी का पूजन कर १०८ बार जपें । अन्तिम दिन हनुमान् जी को सिन्दूर का चोला, लँगोट, ध्वजा, नारियल आदि अर्पित करें । फिर १ या ३ बार मन्त्र पढ़ते हुए मोर-पंख द्वारा झाड़ने से भूत-प्रेत आदि भाग जाते हैं ।

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