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माँ बगलामुखी
हेम रुचिर पट पीत सरोवर, प्रकटित धन्य स्व-नाम ।
मन्त्र-मयी बगलामुखि वैष्णवि, शक्ति सबल बल-धाम ।।
ऊपर गगन हकार धराधर, धरणी बीज ललाम ।
बिन्दु-मयी बगला पीठेश्वरि, ह्रींकारेश्वरि-धाम ।।

बीज-मयी हरि-शक्ति-मयी ह्लीं, मन्त्र-मयी बल-धाम ।
नष्ट करो अरि-व्यूह महा, बगलमुखि मातु प्रणाम ।।
दुश्मन दुष्ट मुखर, मुख-वाणी, स्तम्भित कर-पद-चाल ।
कील करो रसना अरि जिह्वा, बुद्धि करो अरि ब्याल ।।

प्रीति पराग-पगी वसुधा, नभ विष्णु-प्रिया रति-काम ।
सृष्टि-मयी मधु-गन्ध-मयी, भगवन्ति महा-छवि-धाम ।।
गन्ध-पुष्प-मधु-धूप-दीपिका, सरस द्रव्य मधु-पान ।
पूजन-तर्पण-नमन भाव-मय, स्वाहा सहित प्रणाम ।।

क्रोधिनि स्तम्भिनि चँवर-धारिणी, बगलामुखी प्रणाम ।
जय-जय उड्डियान जालन्धर, कामद-गिरि गुरु-धाम ।।
जयति अनन्त-नाथ गुरु जय-जय, श्रीकण्ठ-नाथ गुरु नाह ।
नाथ-शिरोमणि दत्तात्रेय गुरु, शत-शत बार प्रणाम ।।

भगवति षष्टि महा-बगले, सुभगे शत-कोटि प्रणाम ।
जय-जय भय-सर्पिणि, भग-वाहिनि, भग-मालिनि सुख-धाम ।।
भगवति भग शुद्धा भग-पत्नी, जय-जय षष्टि प्रणाम ।
जय भव-सृष्टि योनि-भग-धारिणि, पालिनि-स्थिति-विश्राम ।।

अष्ट-कमल-दल-वासिनि ब्राह्मणि, माहेश्वरि प्रणाम ।
जय-जय कौमारी जय वैष्णवी, वाराही बल-धाम ।।
इन्द्राणी जय चामुण्डा जय, जय लक्ष्मी, जय धाम ।
अष्ट-मातृका संग कमल-दल-वासिनि मातु-प्रणाम ।।

जयति जया-विजया अजिता जय, अपराजिता प्रणाम ।
जृम्भिणि स्तम्भिनि मोहिनि जय-जय, आकर्षिणि छवि-धाम ।।
जय असितांग संग रुरु भैरव, चण्ड-क्रोध परिवार ।
उन्मत्त मस्त कपालि माल-धर, भीषणेश संहार ।।
जय षोडश-दल-वासिनि बगला, स्वाहा सहित प्रणाम ।
स्तम्भिनि जृम्भिणि मोहिनि माते ! चञ्चलादि गुण-धाम ।।
माता स्वाहा सहित प्रणाम ।।
जय अचला, वश्या, कलिका जय, कल्मषादि तव नाम ।
जय धात्री कल्पान्ता माता, आकर्षिणि अभिराम ।।
माता स्वाहा सहित प्रणाम ।।

शाकिनि जयति अष्ट-गन्धा जय, भोगेच्छा कृत-काम ।
जयति भाविका भाव-मयी माँ, बगलामुखी प्रणाम ।।
जय-जय ह्लींकारेश्वरि अर्पित, कनक-पीठ अभिराम ।
पीता पद्म-पराग-मालिका, भूषण भव्य ललाम ।।
पीताम्बर-परिधान-भूषिता, सुधा-सिन्धु मणि-धाम ।
जयति जयति जय ह्लींकारेश्वरि, बगलामुखि प्रणाम ।।
अरि रसना मुग्दर कर राजित, उग्रवती बल-धाम ।
वात-क्षोभ-तूफान शान्त हो, शमित दुखद परिणाम ।।
हरि सकल अरि, ब्याल नष्ट हों, दुश्मन दुष्ट तमाम ।
कर स्तम्भित मुख-वाच-चाल-पद, मिटें शत्रु अविराम ।।
कील करो रसना अरियों की, बुद्धि हरो अविराम ।
दुश्मन दुष्ट विनष्ट-त्रस्त हों, बने जगत् सुख-धाम ।।
गन्ध-पुष्प-मधू-धूप-दीपिका, सरस द्रव्य मधु-पान ।
पूजन-तर्पण-नमन भाव-मय, स्वाहा सहित प्रणाम ।।
स्वर्ण-शिखर रवि-हेम-किरण नव, कनक-पीठमणि-धाम ।
अर्पित पीत पुनीत पद्म-सारि, बगलामुखी प्रणाम ।
जयति जयति जय ह्लींकारेश्वरि ! प्रीति कमल निष्काम ।।
पद्म-राग अम्लान समर्पित, करत नमन बलराम ।।
माता स्वाहा सहित प्रणाम ।।

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