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‘श्रीलक्ष्मी’- नाम मन्त्र द्वारा हवन
– पूर्व-मुख होकर आसन पर बैठे और अपने पास गन्ध, पुष्प, अक्षत, समानान्यार्घ्य-जल, कुश, काष्ठ आदि पूजन सामग्री रखें ।
– कुश से काष्ठ आदि सकल सामग्री का मार्जन करें ।
– भूमि को गो-मय और जल से लीपे ।
– तीन बार ‘मूल-मन्त्र’ अथवा “श्रीं” – एकाक्षर बीज का उच्चारण कर हवन-सामग्री को उठाए और गो-मय व जल से लीपे हुए स्थान पर स्थापित करे ।
– ‘मूल-मन्त्र’ अथवा “श्रीं” – एकाक्षर बीज से ‘महा-लक्ष्मी-स्वरुपा अग्नि’ को स्थापित करे और प्रोक्षित ‘हवन-सामग्री’ को उसमें डाले ।
– माँ लक्ष्मी का ध्यान कर ‘मूल-मन्त्र’ अथवा “श्रीं” – एकाक्षर बीज से तीन बार अग्नि का सिञ्चन कर पञ्चोपचारों द्वारा अग्नि का पूजन करे ।
– फिर कमल-पुष्प, तिल, मधु, घृत, शक्कर, बेल-गूदा मिलाकर बेल की लकड़ी से निम्न ‘नाम-मन्त्रों’ से हवन करे । पहले चार व्याहृतियों की आहुतियाँ दे –
१॰ ॐ भूः स्वाहा, इदमग्नये नमः । २॰ ॐ भूर्भवः स्वः स्वाहा, इदं वायवे नमः । ३॰ ॐ स्वः स्वाहा, इदं सूर्याय नमः । ४॰ ॐ भूर्भुवः सवः स्वाहा, इदं प्रजा-पतये नमः
– अब भगवती लक्ष्मी के नाम-मन्त्रों से आहुतियाँ दे –
ॐ श्रियै नमः स्वाहा
ॐ भू-देव्यै नमः स्वाहा
ॐ लीला-देव्यै नमः स्वाहा
ॐ महा-लक्ष्म्यै नमः स्वाहा
ॐ वरदायै नमः स्वाहा
ॐ विष्णु-पत्न्यै नमः स्वाहा
ॐ वसु-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ हिरण्य-रुपायै नमः स्वाहा
ॐ स्वर्ण-मालिन्यै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-वासिन्यै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-हस्तायै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-प्रियायै नमः स्वाहा
ॐ मुक्तालंकारायै नमः स्वाहा
ॐ चन्द्रायै नमः स्वाहा
ॐ सूर्यायै नमः स्वाहा
ॐ बिल्व-प्रियायै नमः स्वाहा
ॐ ईश्वर्यै नमः स्वाहा
ॐ भुक्त्यै नमः स्वाहा
ॐ मुक्त्यै नमः स्वाहा
ॐ विभूत्यै नमः स्वाहा
ॐ ऋद्धयै नमः स्वाहा
ॐ समृद्धयै नमः स्वाहा
ॐ तुष्ट्यै नमः स्वाहा
ॐ पुष्ट्यै नमः स्वाहा
ॐ कृष्ट्यै नमः स्वाहा
ॐ धनदायै नमः स्वाहा
ॐ धनेश्वर्यै नमः स्वाहा
ॐ श्रद्धायै नमः स्वाहा
ॐ भोगिन्यै नमः स्वाहा
ॐ भोगदायै नमः स्वाहा
ॐ सावित्र्यै नमः स्वाहा
ॐ धात्र्यै नमः स्वाहा
ॐ गायत्र्यै नमः स्वाहा
ॐ सरस्वत्यै नमः स्वाहा
ॐ हिरण्य-वर्णायै नमः स्वाहा
ॐ हरिण्यै नमः स्वाहा
ॐ सुवर्ण-रजत-स्त्रजायै नमः स्वाहा
ॐ हिरण्मय्यै नमः स्वाहा
ॐ अनपगामिन्यै नमः स्वाहा
ॐ लक्ष्म्यै नमः स्वाहा
ॐ अस्व-पूर्वायै नमः स्वाहा
ॐ रथ-मध्यायै नमः स्वाहा
ॐ हस्ति-नाद-प्रबोधिन्यै नमः स्वाहा
ॐ ज्वलंत्यै नमः स्वाहा
ॐ तृप्तायै नमः स्वाहा
ॐ तर्पयंत्यै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-स्थितायै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-वर्णायै नमः स्वाहा
ॐ चन्द्र-प्रभासायै नमः स्वाहा
ॐ यशसा ज्वलंत्यै नमः स्वाहा
ॐ देव-जुष्टायै नमः स्वाहा
ॐ उदारायै नमः स्वाहा
ॐ पद्मनेम्यै नमः स्वाहा
ॐ अलक्ष्मी-नाशिन्यै नमः स्वाहा
ॐ आदित्य-वर्णायै नमः स्वाहा
ॐ गन्ध-द्वारायै नमः स्वाहा
ॐ दुराधर्षायै नमः स्वाहा
ॐ नित्य-पुष्टायै नमः स्वाहा
ॐ करीषिण्यै नमः स्वाहा
ॐ पुष्करिण्यै नमः स्वाहा
ॐ पिंगलायै नमः स्वाहा
ॐ सुवर्णायै नमः स्वाहा
ॐ हेम-मालिन्यै नमः स्वाहा
ॐ हरिणाक्ष्यै नमः स्वाहा
ॐ हरिद्राभायै नमः स्वाहा
ॐ आर्द्रायै नमः स्वाहा
ॐ सरसिज-निलयायै नमः स्वाहा
ॐ सरोज-हस्तायै नमः स्वाहा
ॐ धवल-तरायै नमः स्वाहा
ॐ शुभ-गन्ध-माल्यै नमः स्वाहा
ॐ भगवत्यै नमः स्वाहा
ॐ हरि-वल्लभायै नमः स्वाहा
ॐ मनोज्ञायै नमः स्वाहा
ॐ त्रिभुवन-भूति-करायै नमः स्वाहा
ॐ पद्माननायै नमः स्वाहा
ॐ पद्माक्ष्यै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-सम्भावायै नमः स्वाहा
ॐ क्षमायै नमः स्वाहा
ॐ माधव्यै नमः स्वाहा
ॐ माधव-प्रियायै नमः स्वाहा
ॐ विष्णु-प्रियायै नमः स्वाहा
ॐ अच्युत-वल्लभायै नमः स्वाहा
ॐ देव-देव्यै नमः स्वाहा
ॐ विश्व-प्रियायै नमः स्वाहा
ॐ विश्व-मनोऽनुकूलायै नमः स्वाहा
ॐ श्रीरमा-देव्यै नमः स्वाहा
ॐ श्रीसीतायै नमः स्वाहा
ॐ श्रीराधायै नमः स्वाहा
ॐ श्रीरुक्मिण्यै नमः स्वाहा
ॐ वेदवत्यै नमः स्वाहा
ॐ त्रिपाद-विभूत्यै नमः स्वाहा
ॐ कमलायै नमः स्वाहा
ॐ कमलालयायै नमः स्वाहा
ॐ चञ्चलायै नमः स्वाहा
ॐ हरि-प्रियायै नमः स्वाहा
ॐ दारिद्र्य-परिहारिण्यै नमः स्वाहा
ॐ गृह-लक्ष्म्यै नमः स्वाहा
ॐ त्रैलोक्य-पूजितायै नमः स्वाहा
ॐ विष्ण-वल्लभायै नमः स्वाहा
ॐ वैष्णव्यै नमः स्वाहा
ॐ लोक-सुन्दर्यै नमः स्वाहा
ॐ अमृतोद्-भवायै नमः स्वाहा
ॐ स्वर्ण-रुपायै नमः स्वाहा
ॐ स्वर्ण-प्रभायै नमः स्वाहा
ॐ मुक्तिदायै नमः स्वाहा
ॐ भुक्तिदायै नमः स्वाहा
ॐ यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र-रुपायै नमः स्वाहा
ॐ वरारोहायै नमः स्वाहा
ॐ शांर्गिण्यै नमः स्वाहा
ॐ लोक-धात्र्यै नमः स्वाहा
ॐ ब्रह्म-मात्रे नमः स्वाहा
ॐ पद्म-मुख्यै नमः स्वाहा
ॐ पद्म-कान्त्यै नमः स्वाहा
ॐ जगत्प्रसूत्यै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-जीव-शरण्यायै नमः स्वाहा
ॐ करुणाकरायै नमः स्वाहा
ॐ वात्सल्य-सागरायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-सौलभ्यायै नमः स्वाहा
ॐ कोटि-कन्दर्प-लावण्यायै नमः स्वाहा
ॐ सौन्दर्य-सागरायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-मंगल-मांगल्यायै नमः स्वाहा
ॐ शरणागत-परित्राणायै नमः स्वाहा
ॐ दीनार्ति-हारिण्यै नमः स्वाहा
ॐ सर्वारिष्ट-शान्ति-करायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-रोग-ग्रह-बाधादि-शमनायै नमः स्वाहा
ॐ सर्वापत्ति-वारणायै नमः स्वाहा
ॐ सदानुग्रह-सम्पन्नायै नमः स्वाहा
ॐ धन-धान्य-समृद्धि-करायै नमः स्वाहा
ॐ पुत्र-पौत्र-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ वंश-वृद्धि-करायै नमः स्वाहा
ॐ सर्वाभीष्ट-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-मनो-वाञ्छित-फलदायै नमः स्वाहा
ॐ सर्वानुष्ठान-सिद्धि-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-विधि-विजय-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ हय-भू-गजाश्व-गो-भृत्यादि-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ दिव्यैश्वर्य-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ दिव्य-ज्ञान-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ सत्-सम्प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ शीघ्र-प्रसन्नायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-शान्ति-करायै नमः स्वाहा
ॐ सर्व-मंगल-प्रदायै नमः स्वाहा
ॐ सांगायै नमः स्वाहा
ॐ सायुधायै नमः स्वाहा
ॐ सपरिवारायै नमः स्वाहा
ॐ सपरिकरायै नमः स्वाहा
ॐ स-पार्षदायै नमः स्वाहा
ॐ महा-लक्ष्म्यै नमः स्वाहा
अन्त में माता लक्ष्मी के पुत्रों के नाम-मन्त्रों से आहुतियाँ दे –
ॐ देव-सखाय नमः स्वाहा
ॐ चिक्लीताय नमः स्वाहा
ॐ आनन्दाय नमः स्वाहा
ॐ कर्दमाय नमः स्वाहा
ॐ श्रीप्रदाय नमः स्वाहा
ॐ जातवेदाय नमः स्वाहा
ॐ अनुरागाय नमः स्वाहा
ॐ सम्वादाय नमः स्वाहा
ॐ विजयाय नमः स्वाहा
ॐ वल्लभाय नमः स्वाहा
ॐ मदाय नमः स्वाहा
ॐ हर्षाय नमः स्वाहा
ॐ बलाय नमः स्वाहा
ॐ तेजसे नमः स्वाहा
ॐ दमकाय नमः स्वाहा
ॐ सलिलाय नमः स्वाहा
ॐ गुग्गुलाय नमः स्वाहा
ॐ कुरुण्टकाय नमः स्वाहा
– उक्त नाम-मन्त्रों द्वारा हवन करने के बाद निम्न मन्त्र द्वारा भगवती महा-लक्ष्मी के चरणों में जल अर्पित कर प्रणाम करे –
‘अनेन होमाख्येन कर्मणा महा-लक्ष्मीः प्रीयताम्’
– फिर निम्न मन्त्र पढ़कर अग्नि का विसर्जन करे –
ॐ भो भो वह्ने ! महा-शक्ते ! सर्व-काम-प्रसाधक !
कर्मान्तरेऽपि ! सम्प्राप्ते, सान्निध्यं कुरु सादरम् ।।

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