शाबर-मन्त्र-वल्लरी
विपरीत चालन
मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरू का, एक ठौ सरसों सोला राई, मोरो पठ-वल कोरो जाई । खाय-खाय पड़ै मार, जे करै ते मरै । उलट विद्या ताही पर पड़ै । शब्द साँचा, पिण्ड काँचा, तो हनुमान का मन्त्र साँचा । फुरौ भर, ईश्वरी वाचा । दुहाई माता अञ्जनी की ।।”

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विधि — १ दाना सफेद या पीली सरसों, १६ दाने राई और छोटी छोली २-३ डली नमक की लेकर मूट्ठी में बन्द करके १ बार मन्त्र पढ़े और १ फूंक मारे । इस प्रकार ७ बार फूंक मारे । फिर सिर पर ७ बार घुमाकर जलती आग या गन्दे स्थान में फेंक दे । तत्काल अभिचार करने वाले पर लौट जाएगा । इसी विधि से भूत-प्रेत भी उतारे जाते हैं ।
विशेषः- अपने इष्ट-देवता की दुहाई लगाने से यहं मन्त्र अपने इष्ट-देवता का बन जाता है और अधिक उग्र होकर काम करता है ।

विपरीत चालन
मन्त्रः- “उल्टा तरकश उल्टा तीर, उल्टा चले मोहम्मदा वीर । भूत मार गठरी करे ऊपर मार दो कुदफ्के धरे । वाचा छोड़ कुवाचा चले, तो कुम्भी-पाक नरक में परै ।।”
विधि –
शुक्रवार को लोबान की धूप देकर १०८ बार जपे । फिर चाकू या छुरी से झाड़ दे, तो की हुई विद्या उलट जाय ।

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