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॥ विरिगणपति ॥

इस देवता की वीरभाव से उपासना करे, पात्रासादन तथा शक्त्यार्चन कर पूजा करें तो अधिक लाभ रहे । इस मंत्र के गणक ऋषि, गायत्री छन्द तथा विरिंगणपति देवता है ।

मंत्र :- ॐ ह्रीं विरि विरिगणपति वर वरद सर्वलोकं मे वशमानय स्वाहा ।

ध्यानम्
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं हस्तेषु पाशाङ्कुशौ
बिभ्राणं मधुमत् कपालमनिशं सार्धेन्दु मौलिं भजे ।
पुष्टयाश्लिष्ट तनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोलसद्धस्तया
तद् योन्याहित पाणिं मात्र वसुमत् पात्रोल्लसत् पुष्करम् ॥

यंत्रपूजा उच्छिष्टगणपति के समान करें ।

 

 

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