व्यापार-वर्धन
मन्त्रः- “भँवर वीर तू चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा । उठै जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर, सोखे नहिं जाय ।।”

vadicjagat
विधि – पहले किसी शुभ मुहूर्त में घृत, गुग्गुल की धूप देते हुए १०८ जप कर लें । दूकान खोलकर सफाई करने के बाद काली उड़द के दानों पर १०८ बार मन्त्र पढ़कर दूकान में फैला दें । कुछ दाने गद्दी के नीचे अवश्य ड़ाले । प्रयोग रविवार के दिन से चालू करें । आवश्यकता के अनुसार ३-५ या ७ रविवार तक करें । प्रयोग रविवार से शुरू करे और समापन भी रविवार को ही करे । इससे व्यापार में आशातीत वृद्धि होती है । यदि दूकान बँधी हो, तो वह भी खुल जाती है । कई बार का अनुभूत है ।
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व्यापार-स्तम्भन
मन्त्रः- “भँवर-वीर तू चेला मेरा, बाँध दुकान कहा कर मेरा । उठै न डण्डी बिकै न माल, भँवर-वीर सोखे कर जाय ।।”
विधि –
पहले किसी शुभ मुहूर्त में घृत, गुग्गुल की धूप देते हुए १०८ जप कर लें । दूकान बन्द होते समय काली उड़द के दानों पर १०८ बार मन्त्र पढ़कर दूकान में फैला दें । कुछ दाने गद्दी के नीचे अवश्य ड़ाले । प्रयोग रविवार के दिन से चालू करें । आवश्यकता के अनुसार ३-५ या ७ रविवार तक करें । प्रयोग रविवार से शुरू करे और समापन भी रविवार को ही करे । प्रयोग दूकान या व्यापार-संस्थान के बन्द होते समय ही करना होगा । यह भी अनुभूत प्रयोग है ।

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