शत्रु-पीड़ा-कारक मन्त्र

विधि — पहले किसी मङ्लवार को हनुमान मन्दिर में जाकर तेल, सिन्दूर, लाल फूल चढ़ाए । गुड का भोग लगाकर १०८ बार उक्त मन्त्र का जप करे । प्रयोग के समय मङ्गलवार की आधी रात को उक्त मन्त्र द्वारा हनुमान जी को लाल वस्त्र, चने की दाल, गुड का भोग लगाए । फिर दूसरे लाल कपड़े में तेल, सिन्दूर से शत्रु का नाम लिखकर, ‘अमुक’ की जगह शत्रु का नाम बोलकर सात सुइयाँ कपड़े में चुभो दें । उस कपड़े को मिट्टी की छोटी-सी हांडी में रखकर जमीन में गाड़ दें, तो शत्रु भारी कष्ट में रहेगा । जब अच्छा करना हो, तो जमीन से कपड़ा निकाले, सूई निकाल कर उसे धो डाले ।


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विशेष – उक्त मन्त्र की साधना करते समय स्त्री-सम्पर्क से दूर रहे, सत्य बोले, भूमि पर शयन करे, मांस-मदिरा का सेवन न करे । अन्यथा परिणाम उल्टा हो जाएगा ।


विशेषः- इस प्रकार के मन्त्र उग्र प्रकृति के होते है। स्व-रक्षा व गुरु निर्देशन के अभाव में प्रयुक्त करना हानिकारक है तथा सामाजिक व नैतिक दृष्टि से अनुचित भी। यहाँ पर मात्र प्राचीन विद्या के संरक्षण हेतु प्रस्तुत किये जा रहे हैं ।

 

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