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शाबर मन्त्र के प्रयोग
१. झाड़-फूँक के मन्त्र –
(१) जै जगत्-जननी माता झाल देवी ! वीर बजरङ्ग बली की दुहाई । दुई पद और आधा, सब काम किताब से ज्यादा । पार्वती माता के अढ़ी पद-विद्या । आज मेरा फूके, मेरे गुरू जी का फूको । जब फूकू, तब जागे ।”
(२) हंस गुरू बानो, जे बानो लहकुटी बानों । तोर कोइली, डेढ़ बिहाती । धन-धन तुम्हारे गुरू जी का छाती । तुम्हारे झारे से घूमे हाथी । हाँक परो बोनो गुरू जी के इस पार पारवती के नाम कुटी । कुटी अइज्ञा ।”

२. बिच्छू झाड़ने हेतु मन्त्र –
“काली गाय, लुटियारी पूँछी । तुम्हारे भाठा में एकीस बीछी । सोन का बीछी, रूप का आरा । चौसठ कोस ले, विष मा लाए । उतर विष धारा के धारा हाँक परे । इस गरुड़ जी का चित्त करो, सम्हाल के ।”
३. सर्प-विष झाड़ने का मन्त्र –
(१) आठ रकम के नाम, सोलह रकम का झाड़ । बारह किसम का विद्या, तेरह किसम का हाक-कुवारी काम । चण्डी-नरसिंहनाथ के नाग – नागिन, सरी नारायण के सती – सबरिन । आज मेरो फूका, माँ आबिस हो जाय ।”
(२) ऊच गिरी पर्वत, धवल गिरी सार । ऐन सरपा, करेन विचार । मारेव थापड़, उतारो विष । उतर विष माटी मिस, आगिन के तिरन । गुरू जी का मन्तर । जब फूका, तब जाय ।”

४. नजर झाड़ने का मन्त्र –
“आसन बाँध, पासन बाँधो । बाँधो घर-द्वार । तुम्हरी चरण से सब कुछ बाँधो, बाँधो सारे संसार । पारवती माता का आन्दी पद, विद्या से हर चीज का बाँधो । आज मेरा फूके, कारण कसरहा नजर-डीठ-भूत-प्रेत-मरी मशान उतर जा, उतर जा ।”
विधि : उक्त सभी मन्त्र सम्भलपुर (उड़ीसा) के क्षेत्र में सँपेरों के हैं । Content is available only for registered users. Please login or registerफिर झाड़ना- फूंकना चाहिए ।

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