शिव-साबर
१. सर्प-विष-हरण मन्त्र
“गौरा खेती, शिव की बारी । महादेव तेरी रखवारी । दाव चलावे, दाव बाँधे । पाव चलावें, पाव बाँधे । तलवार चलावे, धार बाँधे । अखाड चलाये, जवान बाँधे ।
मेरी भक्ति, गुरू की शक्ति । दोहाई नरसिंह, दोहाई गौरा पार्वती की, लाख दोहाई, हो गुरु बङ्गाली !”

विधि : Content is available only for registered users. Please login or register २. रक्षा-मन्त्र
“ऐठक बाँधो, बैठक बाँधो, बाँधो भौंर लिलारी । चार कोन पृथ्वी बाँधो, दुखिया के दुख बाँध, बाँधो दसो दुआरी । काली कमल मेघाली, रात सरफा टोना, चोरहीं बघा बराईं चार, जल बराईं, थल बराईं, बराईं आपन काया । निमुठ हाथ धरती बाँधों, ओ आदित्य की दाया । लोहा की कोठरी, बज्जर दुआर । ओह में राखी, कारणी के पिण्ड प्राण । ईश्वर महादेव, गौरा पार्वती की दुहाई । सत्-गुरु के बन्दे पाँव, हे गुरु प्रताप तुम्हार ।”

विधि : Content is available only for registered users. Please login or register ३. नजर, भूत एवं रोग-निवारण मन्त्र
“गुरु सार, गुरु सार । गुरु तत्व – मन्त्र, गुरु अलख निरञ्जन । गुरु बिना होम-जाप ना कीजै, श्याम दिया ना दीजै । गुरु बनाए बड़ा भगत के, गुरु-सेवा ना चूको । गुरु के होखे पाँव-पनहिया, पाँवे लागल जाऊँ । जहाँ गुरु मोरे, तहाँ करो तरुवर छाँव । गुरु के होखे फूल पहाड़, गुरु मोर देले विद्या-भण्डार । असी कोस, चौरासी डाइन । मारो डाइन, फारो पेट । मोरा गुन से नाहीं भेंट । तोर गुन राई – छाई, मोर गुन एह बेरा से फेल खाई । यहाँ के विद्या ना, कामरू – कामाच्छा के विद्या, नेना जोगिनी के सीख । सत्-गुरु के बन्दे पाँव, हे गुरु ! सीख तोहार ।”

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