Print Friendly, PDF & Email

॥ श्रीआकाशभैरव चित्रमाला मंत्र ॥

आकाशभैरव से तात्पर्य रुद्रावतार भगवान् शरभ शालुव पक्षिराज से है । शत्रूनाश हेतु यह प्रयोग किया जाता है ।

गुरु स्मरण एवं इष्ट-देवता-पूजन कर निम्न मन्त्र का १०८ बार पाठ करें अथवा शरभ पूजन उपरांत एक बार पाठ करे । इससे सभी कार्य सिद्ध होते हैं । साधारण कार्यों हेतु ३ पाठ ही पर्याप्त हैं ।

विनियोगः- ॐ श्री आकाशभैरवरस्य चित्रमाला नाममंत्रस्य श्रीआनन्दभैरव ऋषिः, गायत्री छन्दः श्रीआकाशभैरव देवता, हीं बीजं, हुं शक्तिः, सर्वाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यासः- ॐ श्रीआनन्दभैरव ऋषये नमः शिरसि । ॐ गायत्री छन्दसे नमः मुखे । ॐ आकाशभैरव देवतायै नमः हृदि । ॐ ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये । ॐ हुं शक्तये नमः पादयोः । सर्वाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।

करन्यासः- ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः । ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां स्वाहा । ह्रूं मध्यमाभ्यां वषट् । ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां हूं । ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां वौषट् । ॐ ह्रः करतलकर-पृष्ठाभ्यां फट् ।

अङ्गन्यासः- ॐ ह्रां हदयाय नमः । ॐ ह्रीं शिरसे स्वाह । ॐ ह्रूं शिखायै वषट् । ॐ ह्रैं कवचाय हुं । ॐ ह्रौं नेत्र-त्रयाय वौषट् । ॐ ह्रः अस्त्राय फट् ।

॥ ध्यानम् ॥
सहस्त्रपाणि-पद्-वक्त्रं सहत्र-त्रय-लोचनम् ।
सर्वाभीष्टप्रद देवं, स्मरेद् आकाश-भैरवम् ॥

॥ मानस पूजन ॥
ॐ लं पृथ्विीव्यात्मकं गन्धं श्रीआकाशभैरव पादुकाभ्यां नमः अनुकल्पयामि ।
ॐ हं आकाशात्मकं पुष्पं श्रीआकाशभैरव पादुकायां नमः अनुकल्पयामि ।
ॐ यं वाय्वात्मकं धूपं श्रीआकाशभैरव पादुकाभ्यां नमः अनुकल्पयामि ।
ॐ रं वह्नयात्मकं दीपं श्रीआकाशभैरव पादुकाभ्यां नमः अनुकल्पयामि ।
ॐ वं जलात्मकं नैवेद्यं श्रीआकाशभैरव पादुकाभ्यां नमः अनु कल्पयामि ।
ॐ शं शक्त्यात्मकं ताम्बूलं श्रीआकाशभैरव पादुकाभ्यां नमः अनुकल्पयामि ।

॥ मालामंत्र ॥
“ॐ नमो भगवते आकाश-भैरवाय निखिल-लोक-प्रियाय प्रणत-जन-परिताप-विमोचनाय सकल-भूत-निवारणाय सर्वाभीष्ट-प्रदाय नित्याय सच्चिदानन्द-विग्रहाय , सहस्र-बाहवे सहस्र-मुखाय सहस्र-त्रिलोचनाय सहस्र-चरणाय करालाय अखिल-रिपु-संहार-कारणाय , अनेक-कोटि-ब्रह्म-कपाल-माला-अलंकृताय नर-रुधिर-मांस-भक्षणाय महाबल-पराक्रमाय महा-दन्तराय , विष-मोचनाय पर-मंत्र-यंत्र-तंत्र-विद्या-विच्छेदनाय प्रसन्न-वदनांबुजाय एह्येहि आगच्छागच्छ , ममाभीष्टं आकर्षय-आकर्षय आवेशय-आवेशय मोहय-मोहय भ्रामय-भ्रामय द्रावय-द्रावय तापय-तापय सिद्धय-सिद्धय बन्धय-बनधय भाषय-भाषय क्षोभय-क्षोभय भूतप्रेतादि-पिशाचान्-मर्दय-मर्दय कुर्दम-कुर्दम पाटय-पाटय मोटय-मोटय गुम्फय-गुम्फय कम्पय-कम्पय ताडय-ताडय त्रोटय-त्रोटय भेदय-भेदय छेदय-छेदय चण्ड-वातांति-वेगाय सन्तत-गम्भीर-विजृंभणाय, संकर्षय-संकर्षय संक्रामय-संक्रामय प्रवेशय-प्रवेशय स्तोभय-स्तोभय स्तंभय-स्तंभय तोदय-तोदय खेदय-खेदय तर्जय-तर्जय गर्जय-गर्जय नादय-नादय रोदय-रोदय घातय-घातय वेतय-वेतय सकल रिपु-जनान् छिंधि-छिंधि भिंदय-भिंदय अंधय-अंधय रुंधय-रुंधय नर्दय-नर्दय बन्धय-बन्धय श्रीं ह्रीं क्लीं कल्याणकारणाय श्मशानानन्द-महाभोगप्रियाय देवदत्तं (अमुकं)आनय-आनय दूनय-दूनय केलय-केलय मेलय-मेलय प्रपन्न वत्सलाय प्रति वदन दहनामृत किरण नयनाय सहस्र-कोटि-वेताल-परिवृत्ताय मम रिपुन उच्चाटय-उच्चाटय नेपय-नेपय , तापय-तापय सेचय-सेचय मोचय-मोचय लोटय-लोटय स्फोटय-स्फोटय ग्रहण-ग्रहण अनन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटक-पद्म-महापद्म-शंख-गुलिक-महानागभूषणाय, स्थावर-जङ्गमानां विषं नाशय-नाशय प्राशय-प्राशय भस्मी-कुरु भस्मी-कुरु भक्त-जन-वल्लभाय सर्ग-स्थिति-संहारकारणाय कथय-कथय सर्व शत्रून् उद्रेकय-उद्रेकय विद्वेषय-विद्वेषय उत्सादय-उत्सादय उत्पाटय-उत्पाटय बाधय-बाधय साधय-साधय दह-दह पच-पच शोषय-शोषय पेषय-पेषय दूरय-दूरय मारय-मारय भक्षय-भक्षय शिक्षय-शिक्षय समस्त भूतं शिक्षय-शिक्षय श्रीं ह्रीं क्लीं क्ष्म्रयैं अनवरत ताण्डवाय आपदुद्धारणाय साधुजनान् तोषय तोषय भूषय-भूषय पालय-पालय शीलय-शीलय काम-क्रोध-लोभ-मोह-मद-मात्सर्य शमय-शमय दमय-दमय त्रासय-त्रासय शासय-शासय क्षिति-जल-दहन-मरुत-गगन-तरणि-सोमात्म-शरीराय शम-दमोपरति-तितिक्षा-समाधानं-श्रद्धां दापय-दापय प्रापय-प्रापय विघ्नं-विच्छेदनं कुरु-कुरु रक्ष-रक्ष क्ष्म्रयैं क्लीं ह्रीं श्रीं ब्रह्मणे स्वाहा !!”

See Also :- 

1. शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग

2. शरभ मालामन्त्रम्

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.