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श्रीनृसिंह पूजन विधि
नृसिंह जयन्ती इस वर्ष 17 मई 2019 को है । वैष्णव भक्तों को इस दिन नृसिंह जी की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए । इस दिन भगवान् नृसिंह की पूजा करने से उनकी विशिष्ट कृपा प्राप्त होती है ।
पूजन विधि:- पूजाकक्ष या किसी अन्य कक्ष में चौकी पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर अष्टदल कमल चावलों से बनाकर उस पर भगवान् नृसिंह का चित्र स्थापित करें । यदि सम्भव हो, तो उनके समीप ही षोडश-मातृका, नवग्रह आदि का मण्डल बना लें । समस्त पूजन सामग्री को समीप ही रख लें । पूजन करते समय सबसे पहले कम्बल अथवा ऊन के आसन पर पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएँ । इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्रों को पढ़ते हुए तीन बार जल से आचमन करें ।

नृसिंह षडक्षर यन्त्र

आचमनः-
ॐ केशवाय नमः ॐ माधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः

अब निम्नलिखित मंत्र को पढ़ते हुए दोनों हाथ धो लें –
ॐ हृषीकेशाय नमः ।
अब हाथ जोड़कर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करें और सम्बन्धित देवता को मन ही मन नमस्कार करें । इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र के साथ स्वयं पर तथा पूजन सामग्री पर जल का प्रोक्षण करते हुए पवित्र करें: –
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु ।

स्वस्तिवाचनः- अब हाथ में अक्षत पुष्प लेकर निम्नलिखित स्वस्तिवाचन का पाठ करें –
स्वस्ति नः इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभं यावानो विदथेषु जग्मयः ।
अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसागमन्निह ॥
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा ँ् सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥
शतमिन्नु शरदो अन्ति यत्रा नश्चक्रा जरमं तनूनाम् ।
पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मा नो मध्या रीरिषतायुर्गन्तोः ।
अदितिर्द्योरदितिरन्तरिक्षमदितिर्माता स पिता स पुत्रः ।
विश्वे देवा अदितिः पञ्चजना अदितिर्जातमदितिर्जनित्वम् ॥
द्यौः शान्तिरन्तरिक्ष शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्व शान्तिः ।
शान्तिरेव शान्तिः सा मा. शान्तिरेधि ॥
यतो यतः समीहसे ततो नो अभयं कुरु ।
शं नः कुरु प्रजाभ्योऽभयं नः पशुभ्यः ॥
सुशान्तिर्भवतु ॥

अब हाथ में लिए हुए अक्षत पुष्प भगवान् गणपति को अर्पित कर दें । अब हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण करें ।
श्रीमन्महागणाधिपतये नमः । लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः । उमामहेश्वराभ्यां नमः । शचीपुरन्दराभ्यां नमः । वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नमः । मातृपितृचरणकमलेभ्यो नमः । इष्टदेवताभ्यो नमः । कुलदेवताभ्यो नमः । ग्रामदेवताभ्यो नमः । वास्तुदेवताभ्यो नमः । स्थानदेवताभ्यो नमः । एतद् कर्मप्रधान श्री नृसिंह-देवतायै नमः । सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः ॥
इसके पश्चात् दीपक प्रज्वलित करें और गन्ध, अक्षत एवं पुष्प हाथ में लेकर दीपक देवता का ध्यान करें एवं उन्हें निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए दीपक के समक्ष अर्पित कर दें –
भो दीप ! देवरूपस्त्वं कर्मसाक्षीह्यविघ्नकृत् ।
यावत्कर्मसमाप्तिः स्यात् तावत् त्वं सुस्थिरो भवः ॥
दीपस्थदेवतायै नमः, गंधाक्षत पुष्पं समर्पयामि ।

संकल्पः- अब दाएँ हाथ में जल, पुष्प, दूर्वा, सुपारी एवं दक्षिणा लेकर निम्नलिखित संकल्प का उच्चारण करें –
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोः आज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलि प्रथम चरणे बौद्धावतारे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे … … (ग्राम, नगर का नाम लें) परिधावीनाम संवत्सरे संवत् 2076 वैशाख मासे शुक्लपक्षे चतुर्दश्यां शुभतिथौ भृगुवासरे …… (अपने गोत्र का उच्चारण करें) गोत्र उत्पन्नो …… (अपने नाम का उच्चारण करें ।) अहम् मम इह जन्मनि जन्मान्तरे वा कृत सर्वपापक्षयपूर्वक दीर्घायु, विपुल धनधान्यं, पुत्र-पौत्र धनवच्छिन्न-सन्तति-वृद्धि-स्थिरलक्ष्मीकीर्ति-लाभशत्रुपराजयसदभीष्टसिद्ध्यर्थे श्री नृसिंहजयन्ती नाम्नी पर्वे अद्य नृसिंह पूजनं करणार्थं संकल्पं करिष्ये । तत्रादौ निर्विघ्नताया परिसमाप्ति कामः गणेशाम्बिकयो पूजनं करिष्ये ।
इसके पश्चात् हाथ में लिए हुए जल, पुष्प आदि भगवान् गणपति के समक्ष छोड़ दें ।

गणेश पूजन

संकल्प के पश्चात् सर्वप्रथम भगवान् गणपति का पूजन करें । गणपति के पूजन हेतु सर्वप्रथम हाथ जोड़कर निम्नलिखित ध्यान का उच्चारण करें ।
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः ।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ॥
श्रीगणेशाम्बिकाभ्यां नमः

इसके पश्चात् हाथ में लिए हुए अक्षतों को भगवान् गणेश एवं माता गौरी को समर्पित करें ।
अब गणेशजी का पूजन निम्न प्रकार से करें –
तीन बार जल के छींटे दें और बोलें: –
पाद्यं, अर्घ्यं, आचमनीयं ।
सर्वाङ्गस्नानं समर्पयामि ।
स्नान हेतु जल के छींटे दें ।
सर्वाङ्गे पंचामृतस्नानं समर्पयामि । पंचामृत से स्नान कराएँ ।
पंचामृतस्नानान्ते सर्वाङ्गे शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि । शुद्ध जल से स्नान कराएँ ।
सुवासितम् इत्रं समर्पयामि । इत्र चढ़ाएँ ।
वस्त्रं समर्पयामि । वस्त्र अथवा मौली चढ़ाएँ ।
यज्ञोपवीतं समर्पयामि । यज्ञोपवीत चढ़ाएँ ।
आचमनीयं समर्पयामि । जल के छींटे दें ।
गन्धं समर्पयामि । रोली अथवा लाल चन्दन चढ़ाएँ ।
अक्षतान् समर्पयामि । चावल चढ़ाएँ ।
पुष्पाणि समर्पयामि । पुष्प चढ़ाएँ ।
मंदारपुष्पाणि समर्पयामि । सफेद आक के फूल चढ़ाएँ ।
शमीपत्रं समर्पयामि । शमीपत्र चढ़ाएँ ।
दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि । दूर्वा चढ़ाएँ ।
सिंदूरं समर्पयामि । सिन्दूर चढ़ाएँ ।
धूपं आघ्रापयामि । धूप करें ।
दीपकं दर्शयामि । दीपक दिखाएँ ।
नैवेद्यं समर्पयामि । प्रसाद चढ़ाएँ ।
आचमनीयं जलं समर्पयामि । जल के छींटे दें ।
ताम्बूलं समर्पयामि । पान, सुपारी, इलायची आदि चढ़ाएँ ।
नारिकेलफलं समर्पयामि । नारियल चढ़ाएँ ।
ऋतुफलं समर्पयामि । ऋतुफल चढ़ाएँ ।
दक्षिणां समर्पयामि । नकदी चढ़ाएँ ।
कपूरनीराजनं समर्पयामि । कर्पूर आरती करें ।
नमस्कार समर्पयामि । नमस्कार करें ।
पूजन के उपरांत हाथ जोड़कर इस प्रकार प्रार्थना करें: –
ओंकारसंनिभमिभाननमिन्दुभालं मुक्ताग्रबिन्दुममलद्युतिमेकदन्तम् ।
लम्बोदरं कलचतुर्भुजमादिदेवं ध्यायेन्महागणपतिं मतिसिद्धिकान्तम् ॥

अब हाथ में पुष्प लेकर निम्नलिखित मंत्र को उच्चारित करते हुए किया गया यह पूजन कर्म भगवान गणेश को अर्पित कर दें:-
गणेशपूजने कर्म यन्यूनमधिकं कृतम् ।
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोऽस्तु सदा मम ॥
अनया पूजया सिद्धिबुद्धिसहितो, महागणपतिः प्रीयतां न मम ॥

षोडशमातृका पूजन

उपर्युक्त प्रकार से गणेश जी की पूजा-अर्चना करने के पश्चात् गौरी आदि षोडशमातृकाओं का पूजन करें । सर्वप्रथम निम्नलिखित मन्त्र से उनका ध्यान करें:-
ॐ गौरी पद्मा शची मेधा सावित्री विजया जया ।
देवसेना स्वधा स्वाहा मातरो लोकमातरः ॥
धृतिपुष्टि तथा तुष्टिः आत्मनः कुलदेवताः ।
गणेशेनाधिकाह्यैता वृद्धौ पूज्याश्च षोडशः ॥

उपर्युक्त प्रकार से ध्यान करने के पश्चात् ‘पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षत पुष्पाणि समर्पयामि’ ऐसा कहकर गन्ध, अक्षत एवं पुष्प अपने दायीं ओर स्थित षोडशमातृका मण्डल पर चढ़ा दें ।

नृसिंह पूजन

उक्त समस्त प्रक्रिया के पश्चात् प्रधान पूजा में नृसिंह जी के पूजन हेतु सर्वप्रथम हाथ में अक्षत एवं पुष्प लें तथा निम्नलिखित मन्त्र से भगवान् नृसिंह जी का ध्यान करेंः-
तपन-सोम-हुताशन-लोचनं घन-विराम-हिमांशु-समप्रभम् ।
अभय-चक्र-पिनाक-वरान्करैर्दधतमिन्दु-धरं नृहरिं भजे ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि ।

इसके उपरान्त ध्यान हेतु लिए गए अक्षत एवं पुष्प भगवान् नृसिंह के समक्ष अर्पित करें ।
आवाहन:- हाथ में पुष्प लेकर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए नृसिंह जी का आवाहन करें एवं उन पुष्पों को सामने स्थित चौकी पर चढ़ा दें:-
ॐ नृसिंहाय नमः । आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि ॥ अब पुष्प समर्पित करें ।
आसन:- निम्नलिखित मंत्र से भगवान् नृसिंह को आसन अर्पित करें:-
तप्तकाञ्चनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम् ।
अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम् ॥

आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का पुष्प अर्पित करें । इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह के समक्ष किसी पात्र अथवा भूमि पर तीन बार जल छोड़े ।
ॐ नृसिंहाय नमः । पाद्यं समर्पयामि ॥ अर्घ्यं समर्पयामि । आचमनीयं समर्पयामि ॥
इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को गंगाजल से अथवा शुद्ध जल से स्नान कराएँ ।
मन्दाकिन्यास्तु यद् वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि ।

पञ्चामृत स्नान:- स्नान के पश्चात् भगवान् नृसिंह को पंचामृत (घी, शहद, दुग्ध, शर्करा एवं दही) से स्नान करवाएँ एवं स्नान करवाते समय निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें:-
पयो दधि घृतं चैव मधुशर्करयान्वितम् ।
पञ्चामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । पंचामृत स्नानं समर्पयामि ।

शुद्धोदक स्नान:- पंचामृत से स्नान करवाने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को शुद्ध जल से स्नान कराएँ:-
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं तुभ्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि ॥

वस्त्र:- शुद्धोदक स्नान करवाने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र से भगवान् नृसिंह को वस्त्र अर्पित करें अथवा वस्त्र एवं उपवस्त्र के निमित्त मौली के दो टुकड़े चढ़ाएँ :
शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जाया रक्षणं परम् ।
देहालङ्करणं धृत्वा, मतः शान्तिं प्रयच्छ मे ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि ॥

आभूषण:- वस्त्र एवं उपवस्त्र अर्पित करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र से भगवान् नृसिंह को आभूषण अर्पित करें:-
रत्नकङ्कणवैदूर्यमुक्ताहारादिकानि च ।
सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकुरुष्व भोः ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । आभूषणं समर्पयामि ॥

गन्ध:- आभूषण अर्पित करने के पश्चात् निम्न मन्त्र से भगवान् नृसिंह को गन्ध (रोली-चन्दन) अर्पित करें:-
श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम् ।
विलेपनं सुरश्रेष्ठं चन्दनं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । गन्धं समर्पयामि ॥

अक्षत:- इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र से भगवान् नृसिंह को अक्षत (बिना टूटे हुए चावल) अर्पित करें:-
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठे कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः ।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरः ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । अक्षतान् समर्पयामि ॥

पुष्प एवं पुष्पमाला:- इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को पुष्प एवं पुष्पमाला अर्पित करें:-
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो ।
मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । पुष्पं पुष्पमालां च समर्पयामि ॥

धूप:- इसके पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को सुगंधित धूप अर्पित करें:-
वनस्पतिरसोद्धूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः ।
आप्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । धूपमाघ्रापयामि ॥

दीप:- धूप के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को दीप दिखाएँ:-
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया ।
दीपं गृहाण देवेशि त्रैलोक्यतिमिरापहम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । दीपकं दर्शयामि ॥

नैवेद्य:- इसके पश्चात् केले के पत्ते पर अथवा किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर नैवेद्य (प्रसाद) रखें । तदुपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को नैवेद्य अर्पित करें:-
शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च ।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः। नैवेद्यं निवेदयामि ॥
उत्तरापाऽनार्थं हस्तप्रक्षालनार्थं मुखप्रक्षालनार्थं च जलं समर्पयामि

ऐसा कहते हुए जल अर्पित करें ।
ऋतुफल:- निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को ऋतुफल अर्पित करें:-
इदं फलं मया देवि स्थापितं पुरतस्तव ।
तेन में सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । ऋतुफलं समर्पयामि ॥
ऋतुफलान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि ॥

इसके पश्चात् आचमन हेतु जल छोड़े।
ताम्बूल:- अब निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह को लौंग-इलायची युक्त पान चढाएँ:-
पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लदलैर्युतम् ।
एलालवङ्गसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम् ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । मुखवासार्थे ताम्बूल वीटिकां समर्पयामि ॥

दक्षिणा:- इसके पश्चात् पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु यथा-शक्ति भगवान् नृसिंह को निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए दक्षिणा चढाएँ –
हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः ।
अनन्तपुण्यफलदमतः शांतिं प्रयच्छ मे ॥
ॐ नृसिंहाय नमः । पूजा साफल्यार्थं दक्षिणां समर्पयामि ॥

आरती:- इसके पश्चात् एक थाली में कर्पूर एवं घी का दीपक प्रज्वलित करें और निम्नलिखित आरती करें-
जय नृसिंह देवा, जय नृसिंह देवा ।
दुखित जनों के कष्ट क्षण में दूर करो । जय नृसिंह देवा ॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विन से मन का ।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥ जय नृसिंह देवा ॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण जाऊं किसकी ।
तुम बिन और न कोई, भक्ति करूं किसकी ॥ जय नृसिंह देवा ॥
तुम पूरण परमेश्वर, तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमात्मा, तुम सबके स्वामी ॥ जय नृसिंह देवा ॥
तुम दया के सागर, तुम पालन कर्ता ।
मैं अज्ञानी खलकामी, कृपा करो नृसिंह ॥ जय नृसिंह देवा ॥
तुम हो सबके रक्षक, सबके प्राणपति ।
किस विधि मिले दया, तुम्हारी हे नृसिंह स्वामी ॥ जय नृसिंह देवा ॥
दीन-बन्धु दुख-हर्ता, हे नृसहि देवा ।
अपने हाथ उठाओ, द्वार खड़ा तेरे ॥ जय नृसिंह देवा ॥
विषय विकार हटाओ, पाप हरो नृसिंह ।
श्रद्धाभक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥ जय नृसिंह देवा ॥

पुष्पाञ्जलि और प्रदक्षिणा:- अब निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए पुष्पांजलि और प्रदक्षिणा करें:-
नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च ।
पुष्पाञ्जलिर्मया दत्ता गृहाण परमेश्वरः ॥
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च ।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे पदे ।
ॐ नृसिंहाय नमः, प्रार्थनापूर्वकं नमस्कारान् समर्पयामि ॥

समर्पण:- निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए भगवान् नृसिंह के समक्ष पूजन कर्म को समर्पित करें और इस निमित्त जल अर्पित करें:-
कृतेनानेन पूजनेन श्री नृसिंहदेवतायै प्रीयतां न मम ॥
उक्त प्रक्रिया के पश्चात् भगवान् नृसिंह के समक्ष दण्डवत् प्रणाम करें तथा अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा माँगते हुए, भगवान् नृसिंह से सुखसमृद्धि, आरोग्य, शत्रुओं से रक्षा तथा वैभव की कामना करें । इसके पश्चात् भगवान् नृसिंह से सम्बन्धित स्तोत्रमन्त्रादि का पाठ भी कर सकते हैं ।

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