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श्रीवगला सिद्ध शाबर मन्त्र
(१)
श्री वगलामुखी के निम्न मन्त्र का अयुत (दस सहस्त्र) जप करने से सिद्धि मिलती है। हल्दी, हड़ताल, मालकांगनी (ज्योतिष्मती) को कूट कर कटु-तैलाक्त निम्ब-काष्ठ, बदरी-काष्ठ या खदिर-काष्ठ की समिधा द्वारा नित्य अष्टोत्तर-शत हवन करें। अर्थात् दस माला मन्त्र-जप और एक माला से हवन किया करे। दस दिनों में अभीष्ट सिद्धि मिलेगी।

baglamukhi


मन्त्रः-
“ॐ ह्ल्रीं वगला-मुखि ! जगद्-वशकंरि ! वगले पीताम्बरे प्रसीद प्रसीद, मम सर्व-मनोरथान् पूरय पूरय ह्ल्रीं ॐ।”
हवन करते समय उक्त मन्त्र के अन्त में ‘स्वाहा’ जोड़कर अग्नि में आहुति छोड़े। पूर्णाहुति देकर निम्न स्तुति का पाठ करे-

स्तुति
नमो देवि वगले ! चिदानन्द-रुपे !
नमस्ते जगद्-वश-करे सौम्य-रुपे !
नमस्ते रिपु-ध्वंस-कारी-त्रिमूर्ते ।
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।।१
सदा पीत-वस्त्राढ्य-पीत-स्वरुपे !
रिपु-मारणार्थे गदा-युक्त-रुपे !
सदेषत् स-हासे सदाऽऽनन्द-मूर्ते !
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।।२
त्वमेवासि मातेश्वरी त्वं सखे त्वं ।
त्वमेवासि सर्वेश्वरी तारिणी त्वं ।
त्वमेवासि शक्तिर्बलं साधकानाम् ।
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।।३
रणे तस्करे घोर-दावाग्नि-पुष्टे ।
विपत्-सागरे दुष्ट-रोगाग्नि-प्लुष्टे ।।
त्वमेका मतिर्यस्य भक्तेषु चित्ताः।
स षट्-कर्मणानां भवेत्याशु दक्षः ।।४

(२)
बगला-शाबर-मन्त्रः-
(श्रीबगलामुखी रहस्यम्)

“ॐ मलयाचल बगला भगवती महा-क्रूरी, महा-कराली, राज-मुख-बन्धनं, ग्राम-मुख-बन्धनं, ग्राम-पुरुष-बन्धनं, काल-मुख-बन्धनं, चौर-मुख-बन्धनं, व्याघ्र-मुख-बन्धनं, सर्व-दुष्ट-बन्धनं, सर्व-जन-बन्धनं वशीकुरु हुं फट् स्वाहा।”

 

 

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