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सर्प-भय-निवारण के प्रयोग
यदि किसी को अपने आस-पास सर्पों का भय हो, तो इस प्रयोगों में से किसी एक अथवा सभी का उपयोग कर उक्त भय से मुक्त हो सकते हैं ।
१॰ निम्न मन्त्र का पाठ करें –
“नर्मदायै नमो प्रातः, नर्मदायै नमो निशि । नमोऽस्तु ते नर्मदे ! तुभ्यं, त्राहि मां विष-सर्पतः ।।
सर्पाय सर्प-भद्रं ते, दूरं गच्छ महा-विषम् । जनमेजय-यज्ञान्ते, आस्तिक्यं वन्दनं स्मर ।।
आस्तिक्य-वचनं स्मृत्वा, यः सर्पो न निवर्तते । भिद्यते सप्तधा मूर्घ्नि, शिंश-वृक्ष-फलं यथा ।।
यो जरुत्कारुण यातो, जरुत्-कन्या महा-यशाः । तस्य सर्पश्च भद्रं ते, दूरं गच्छ महा-विषम् ।।
दोहाई राजा जनमेजय ! दोहाई आस्तीक मुनि की ! दोहाई जरुत्कार की ! ।”

२॰ नीली सरसों हाथ में लेकर सरसों पर फूँक मारकर ३ बार हथेली पर ताली बजावे । ऐसे ही क्रिया करते हुए ७ बार सरसों घर में बिखेर दें ।
३॰ हल्दी के धुवें से सर्प भागते हैं ।
४॰ ‘ॐ हौं जूं सः’ – १००० जप नित्य । इससे सर्व रक्षा होती है ।
५॰ बेल-पत्र पर अनार की कलम व देवी चन्दन से ‘राम’ लिखकर शिवजी को चढ़ायें ।
६॰ “शरणागत-दीनार्त्त परित्राण परायणे । सर्व-स्यार्ति-हरे देवी नारायणी नमोऽस्तु ते ।।” – १०८ बार नित्य पाठ करें ।

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