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साधना सफलता का शाबर मन्त्र

मन्त्रः-
“ॐ इक ओंकार, सत नाम करता पुरुष निर्मै निर्वैर अकाल मूर्ति अजूनि सैभं गुर प्रसादि जप आदि सच, जुगादि सच है भी सच, नानक होसी भी सच –
मन की जै जहाँ लागे अख, तहाँ-तहाँ सत नाम की रख । चिन्तामणि कल्पतरु आए कामधेनु को संग ले आए, आए आप कुबेर भण्डारी साथ लक्ष्मी आज्ञाकारी, बारां ऋद्धां और नौ निधि वरुण देव ले आए । प्रसिद्ध सत-गुरु पूर्ण कियो स्वार्थ, आए बैठे बिच पञ्ज पदार्थ । ढाकन गगन, पृथ्वी का बासन, रहे अडोल न डोले आसन, राखे ब्रह्मा-विष्णु-महेश, काली-भैरों-हनु-गणेश । सूर्य-चन्द्र भए प्रवेश, तेंतीस करोड़ देव इन्द्रेश । सिद्ध चौरासी और नौ नाथ, बावन वीर यति छह साथ । राखा हुआ आप निरंकार, थुड़ो गई भाग समुन्द्रों पार । अटुट भण्डार, अखुट अपार । खात-खरचत, कछु होत नहीं पार । किसी प्रकार नहीं होवत ऊना । देव दवावत दून चहूना । गुर की झोली, मेरे हाथ । गुरु-बचनी पञ्ज तत, बेअन्त-बेअन्त-बेअन्त भण्डार । जिनकी पैज रखी करतार, नानक गुरु पूरे नमस्कार ।
अन्नपूर्णा भई दयाल, नानक कुदरत नदर निहाल ।
ऐ जप करने पुरुष का सच, नानक किया बखान,
जगत उद्धारण कारने धुरों होआ फरमान ।
अमृत-वेला सच नाम जप करिए ।
कर स्नान जो हित चित्त कर जप को पढ़े, सो दरगह पावे मान ।
जन्म-मरण-भौ काटिए, जो प्रभ संग लावे ध्यान । जो मनसा मन में करे, दास नानक दीजे दान ।।”

vadicjagat
विधिः- उक्त मन्त्र का जप किसी भी साधना के पहले और अन्त में करने से ‘साधना’ में सफलता मिलती है ।

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