साबर मन्त्रों को सिद्ध कैसे करें ?
‘साबर’ मन्त्रों की साधना के पूर्व ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र को 21 बार जप लेना चाहिए । इसके बाद अपने अभीष्ट मन्त्र की साधना करें । ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र का जप करते समय ध्यान रखें कि इसका कोई भी शब्द या वर्ण उच्चारण में अशुद्ध न हो ।
सर्वार्थ-साधक-मन्त्र-
“गुरु सठ गुरु सठ गुरु हैं वीर, गुरु साहब सुमरौं बड़ी भाँत । सिंगी टोरों बन कहौं, मन नाऊँ करतार । सकल गुरु की हर भजे, घट्टा पकर उठ जाग, चेत सम्भार श्री परम-हंस ।”

इसके पश्चात् गणेश जी का ध्यान करके निम्न मन्त्र की एक माला जपें –
ध्यानः-
“वक्र-तुन्ड, माह-काय ! कोटि-सूर्य-सम-प्रभ !
निर्विघ्नं कुरु मे देव ! सर्व-कार्येषु सर्वदा ।।”

मन्त्रः-
“वक्र-तुण्डाय हुं ।”
फिर निम्न-लिखित मन्त्र से दिग्बन्धन कर लें –
“वज्र-क्रोधाय महा-दन्ताय दश-दिशो बन्ध बन्ध, हूं फट् स्वाहा ।”
उक्त मन्त्र से दशों दिशाएँ सुरक्षित हो जाती है और किसी प्रकार का विघ्न साधक की साधना में नहीं पड़ता । नाभि में दृष्टि जमाने से ध्यान बहुत शीघ्र लगता है और मन्त्र शीघ्र सिद्ध होते हैं ।
इसके बाद मन्त्र को सिद्ध करने के लिए उसका जप करना चाहिए । किसी मन्त्र को सिद्ध करने के लिए ‘दशहरा’, ‘दीपावली’, ‘होली’, ‘ग्रहण-काल’, ‘शिवरात्रि’, नवरात्रि आदि स्वयं सिद्ध पर्व माने जाते हैं ।

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