॥ शमी पूजन प्रयोगः ॥ राजा सजधज कर शमी पूजन हेतु नगर के बाहर जब कुछ तारे उदय हों उस समय के विजय नाम योग में प्रस्थान करे । शमीवृक्ष के पास भूमि शुद्धकर श्वेत वस्त्र पर चावलों से अष्टदल बनाकर उस पर कुंभ स्थापित करे । संकल्प करे- अद्येत्यांदि यात्रायां विजय सिद्धयर्थं गणेशमातृका वास्तु… Read More


॥ अथ अश्व गज पूजन प्रयोगः ॥ प्रतिपदा से लेकर नवरात्र पर्यन्त गजाश्वों का पूजन करे । वस्त्रादि अलंकारों से सुसज्जित कर गंधादि से पूजन करे । एक पिण्ड प्रतिदिन पायसान्न, घृत, गुड़, शहद एवं सुरायुक्त बनाकर गजाश्वों को खिलावें । स्वाति नक्षत्र में उच्चैःश्रवा हय आया हैं । त्वाष्ट्र में गजाश्वों की पूजा नहीं… Read More


॥ नवदुर्गा प्रार्थना व ध्यान ॥ वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् । वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥ १ ॥ दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू । देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥ २ ॥… Read More


॥ सिद्धिदात्री ॥ यह देवी त्रिपुरसुन्दरी का ही स्वरूप है । यह कमलासना भी है एवं सिंहारूढा भी है । इसी की कृपा से शिव ने अन्यान्य सिद्धियों को प्राप्त किया था । यह देवि अणिमादि अष्टसिद्धियों से परिवेष्टित एवं सेवित है । ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्री कृष्ण जन्म खण्ड में १८ सिद्धियों का वर्णन… Read More


॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र – माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर ‘विजये गौरि गान्धारि’, फिर ‘त्रिभु’, इसके बाद तोय (व), मेष (न), फिर ‘वशङ्करि’, फिर ‘सर्व’ पद, फिर ससद्यल (लो), फिर ‘क वशङ्करि’, फिर ‘सर्वस्त्री पुरुष के बाद ‘वशङ्करि’, फिर ‘सु द्वय’ (सु… Read More


॥ हरगौरी मंत्र ॥ मंत्र :- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं हरिहर विरञ्च्याद्याराधिते शिवशक्ति स्वरूपे स्वाहा । यह मंत्र आय एवं शक्तिवर्द्धक है ॥ ॥ गौरी ध्यानम् ॥ गौराङ्गीं धृतपङ्कजां त्रिनयनां श्वेताम्बरां सिंहगां, चन्द्रोद्भासितशेखरां स्मितमुखीं दोर्भ्या वहन्तीं गदाम् । विष्ण्विन्द्राम्बुजयोनि शंभुत्रिदशैः संपूजिताङ्घ्रिद्वयां, गौरी मानसपङ्कजे भगवतीं भक्तेष्टदां तां भजे ॥… Read More


॥ महागौरी ॥ अग्निपुराण के अनुसार गौरी पूजन तृतीया, अष्टमी या चतुर्दशी को करना चाहिये । सिंह सिद्धान्त सिन्धु में चार भुजा देवी का ध्यान दिया है एवं अग्नि पुराण में सिंहस्थ या वृकस्थ देवी का आठ या अठारह भुजा स्वरूप में पूजन करने को कहा है।… Read More


॥ कालरात्रि ॥ ॥ कालरात्रि प्रयोग विधानम् ॥ कालरात्रि का प्रयोग अचूक हैं । यह संहार व सम्मोहन दोनों की अधिष्ठात्री हैं । ब्रह्मा, विष्णु, महेश इन्हीं के प्रभाव से योगनिद्रा में रहते हुये आराधना व तपस्या में लीन रहते हैं । जब शत्रु बाधा, प्रेतादिकबाधा प्रबल हो बगला, प्रत्यंगिरा, शरभराजादि के प्रयोग शिथिल हो… Read More


॥ श्रीराम कृत कात्यायनी स्तुति ॥ ॥ श्रीराम उवाच ॥ नमस्ते त्रिजगद्वन्द्ये संग्रामे जयदायिनि । प्रसीद विजयं देहि कात्यायनि नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥ सर्वशक्तिमये दुष्टरिपुनिग्रहकारिणि । दुष्टजृम्भिणि संग्रामे जयं देहि नमोऽस्तु ते ॥ २ ॥ त्वमेका परमा शक्तिः सर्वभूतेष्ववस्थिता । दुष्टं संहर संग्रामे जयं देहि नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥… Read More