श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-117 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-117 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सत्रहवाँ अध्याय पराजित होकर दैत्यराज सिन्धु का अपने भवन में आकर अत्यन्त चिन्ताग्रस्त होना, उसकी पत्नी दुर्गा का वहाँ उपस्थित होना, दुर्गा के पूछने पर दैत्यराज सिन्धु का अपनी चिन्ता का कारण बतलाना, दुर्गा का उसे समझाना तथा मयूरेश से सन्धि करने के लिये कहना, किंतु सिन्धु का… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-116 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-116 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सोलहवाँ अध्याय देव मयूरेश द्वारा सिन्धु दैत्य पर विजय प्राप्ति करने पर मुनिगणों तथा देवी पार्वती एवं शिव का उनके दर्शन के लिये आना, युद्ध में मृत देवगणों को खोजने के लिये मयूरेश तथा मुनिगणों का जाना, देव मयूरेश द्वारा मृत देवों को अपने शरीर की वायु के… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-115 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-115 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पन्द्रहवाँ अध्याय दैत्यराज सिन्धु का सुसज्जित होकर रणभूमि के लिये प्रस्थान, सिन्धु का मयूरेश की सेना के वीरों को पराजित कर मयूरेश के साथ घोर संग्राम, मयूरेश का सर्वत्र चतुर्भुजरूप दिखाना, मोहित होकर सिन्धुदैत्य का अपने भवन में वापस आना अथः पञ्चदशाधिकशततमोऽध्यायः सिन्धुवैरुप्यकरणं ब्रह्माजी बोले — अपनी सेना… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-114 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-114 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चौदहवाँ अध्याय दैत्यराज सिन्धु की सेना का मयूरेश की सेना के साथ भीषण संग्राम और सिन्धुसेना की पराजय अथः चतुर्दशोत्तरशततमोऽध्यायः श्रीगणेशसेनाविजयवर्णनं वीर बोले — [ हे स्वामिन्!] नाना प्रकार के शस्त्रों से युद्ध करने में कुशल वे दोनों मैत्र तथा कौस्तुभ नामक वीर अमात्य मृत्यु को प्राप्त हो… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-113 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-113 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तेरहवाँ अध्याय युद्ध के लिये दैत्यराज सिन्धु की चतुरंगिणी सेना का प्रस्थान, मयूरेश की सेना और दैत्यसेना का भीषण संग्राम, सिन्धुसेना के दो अमात्य वीर – मैत्र और कौस्तुभ का वीरभद्र एवं कार्तिकेय से युद्ध तथा दोनों अमात्य वीरों के वध का वर्णन अथः त्रयोदशाधिकशततमोऽध्यायः मित्रकौस्तुभवध ब्रह्माजी बोले… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-112 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-112 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ बारहवाँ अध्याय मयूरेश का गणों की सेना के साथ सिन्धुदैत्य पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान, गणों द्वारा दैत्य सिन्धु की सेना पर आक्रमण, पराजित हो सिन्धुसेना का पलायन, क्रुद्ध दैत्य सिन्धु का स्वयं भी युद्ध के लिये प्रस्थान अथः द्वादशाधिकशततमोऽध्यायः मयूरेशस्य युद्धाय निश्चयः ब्रह्माजी बोले — दूसरे… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-111 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-111 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ ग्यारहवाँ अध्याय नन्दीश्वर का दैत्य सिन्धु की सभा में प्रवेश करके मयूरेश का सन्देश सुनाना, किंतु दैत्य सिन्धु के द्वारा देवताओं को मुक्त करने से मना कर देना, नन्दीश्वर का वापस लौटकर मयूरेश को सम्पूर्ण वृत्तान्त बतलाना, मयूरेश द्वारा गणों को युद्ध की आज्ञा देना अथः एकादशाधिकशततमोऽध्यायः विचारवर्णनं… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-110 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-110 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ दसवाँ अध्याय सिन्धु दैत्य द्वारा गण्डकीनगर में बन्दी बनाये गये देवताओं को लिये मयूरेश का नन्दीश्वर को वहाँ प्रेषित करना अथः दशाधिकशततमोऽध्यायः दूतप्रेषणं ब्रह्माजी बोले — प्रसन्नता में भरे हुए विजयी मयूरेश सबसे आगे चल रहे थे और उनके पीछे वे मुनिबालक जा रहे थे, और फिर वृषभ… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-109 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-109 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ नौवाँ अध्याय देवर्षि नारद से शिव-पार्वती का मयूरेश के विवाह के लिये कन्या के अन्वेषण के लिये कहना, देवर्षि नारद द्वारा सिद्धि एवं बुद्धि नामक कन्याओं को मयूरेश के योग्य बताना, शिव-पार्वती तथा ससैन्य मयूरेश का गण्डकी नगर की ओर प्रस्थान, मार्ग में हेम नामक दैत्य का ससैन्य… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-108 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-108 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ आठवाँ अध्याय पन्द्रहवें वर्ष में मयूरेश्वर द्वारा व्याघ्ररूपी दैत्य को विकृतरूप वाला बनाने की कथा तथा यमराज के गर्वापहरण का आख्यान अथः अष्टाधिकशततमोऽध्यायः रविजगर्वपरिहारं ब्रह्माजी बोले — पन्द्रहवें वर्ष में एक दिन मयूरेश बालकों के साथ पवित्र जलवाली ब्रह्मकमण्डलु (कमण्डलुभवा) नामक नदी में स्नान करने गये ॥ १… Read More