श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -015 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पन्द्रहवाँ अध्याय शिवमाहात्म्य का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे पञ्चदशोऽध्यायः शङ्करस्य त्रिगुणरूपवर्णनं सनत्कुमार बोले —  हे महामते ! आप और भी शिवमाहात्म्य का वर्णन करें, हे प्राणियों के अधिनाथ ! हे महान् गुणों वाले! आप सर्वज्ञ हैं ॥ १ ॥ शैलादि बोले —  हे मुने! अनेक श्रेष्ठ मुनियों ने अनेक… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -014 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौदहवाँ अध्याय भगवान् महेश्वर के पंचब्रह्मात्मक ईशान, तत्पुरुष आदि स्वरूपों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे चतुर्दशोऽध्यायः पञ्चब्रह्मकथनं सनत्कुमार बोले —  हे गणों में श्रेष्ठ नन्दिन् ! जीवों के लिये कल्याणकारी तथा परम पवित्र पंचब्रह्मों के विषय में मुझे बताइये ॥ १ ॥ नन्दिकेश्वर बोले —  हे ब्रह्माजी के उत्तम… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -013 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तेरहवाँ अध्याय भगवान् सदाशिव के शर्व, भव आदि आठ स्वरूपों तथा उनकी शक्तियों एवं पुत्रों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे त्रयोदशोऽध्यायः शिवाष्टमूर्तिवर्णनं सनत्कुमार बोले —  हे नन्दिन् ! उमापति परमेष्ठी अष्टमूर्ति महेश्वर शिव की और भी महिमा मुझे बताइये ॥ १ ॥ नन्दिकेश्वर बोले —  मैं जगत् को व्याप्त… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -012 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बारहवाँ अध्याय भगवान् शिव की अष्टमूर्तियों का स्वरूप तथा उनकी विश्वरूपता श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे द्वादशोऽध्यायः शिवविश्वरूपवर्णनं सनत्कुमार बोले —  हे गणेश्वर ! हे महामते ! विश्वरूप महात्मा भगवान् शंकर की आठ मूर्तियों को आप मुझे बतायें ॥ १ ॥ नन्दिकेश्वर बोले —  हे कमलयोनि (ब्रह्मा) – के पुत्र !… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -011 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् शिव तथा देवी पार्वती की विभूतियों का वर्णन एवं लिङ्गपूजन का माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे एकादशोऽध्यायः शिवविभूतिमहिमवर्णनं सनत्कुमार बोले —  परापरवेत्ताओं में श्रेष्ठ तथा परमेश्वर शिव को प्राप्त कर लेने वाले हे गणाधिप ! अब आप मुझसे शिव तथा पार्वती की विभूतियों का वर्णन करें ॥… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -010 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ दसवाँ अध्याय उमापति शिव के माहात्म्य का वर्णन तथा शिव के आदेश से ही सृष्टि-पालन आदि सभी कार्यों का संचालन श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे दशमोऽध्यायः उमापतेर्महिमवर्णनं सनत्कुमार बोले —  हे शिवभक्त ! हे महाप्राज्ञ ! हे भगवन्! हे नन्दिकेश्वर ! आप उमापति शिवजी की महिमा का पुनः वर्णन कीजिये ॥… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -009 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ नौवाँ अध्याय पशु, पाश एवं पशुपति की व्याख्या, पाशुपतयोग का माहात्म्य तथा पशुपाशमोक्ष विवरण श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे नवमोऽध्यायः पाशुपतव्रतवर्णनं ऋषिगण बोले —  हे सूतजी ! देवताओं ने, ब्रह्माजी ने तथा उत्कृष्ट कर्मों वाले स्वयं विष्णु ने पूर्वकाल में इस दिव्य एवं मंगलकारी व्रत को किया था । पतित विप्र… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -008 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ आठवाँ अध्याय शिवमहामन्त्र के जप से ब्राह्मणपुत्र दुराचारी धुन्धुमूक का शिव की कृपा से शिवगणत्व को प्राप्त करना श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे अष्टमोऽध्यायः अष्टाक्षरप्रशंसा सूतजी बोले — हे द्विजश्रेष्ठो ! ‘ॐ नमो नारायणाय‘ यह अष्टाक्षर मन्त्र तथा द्वादशाक्षर मन्त्र ( ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ) – ये परमात्मा के श्रेष्ठ… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -007 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सातवाँ अध्याय भगवान् विष्णु के अष्टाक्षर तथा द्वादशाक्षर मन्त्र जप की महिमा में ऐतरेय ब्राह्मण की कथा श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे सप्तमोऽध्यायः द्वादशाक्षरप्रशंसा ऋषिगण बोले — किस [ मन्त्र] – के जप से प्राणी सम्पूर्ण सांसारिक भय आदि से मुक्त हो जाता है और समस्त पापों से छूटकर परम गति… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -006 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ छठा अध्याय भगवान् विष्णु से अलक्ष्मी (ज्येष्ठा–दरिद्रा ) तथा लक्ष्मी का प्रादुर्भाव एवं लक्ष्मी तथा दरिद्रा के निवासयोग्य स्थानों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे षष्ठेऽध्यायः अलक्ष्मीवृत्तं ऋषिगण बोले —  देवों के भी देव धीमान् विष्णु का मायावी होना तो हम लोगों ने सुन लिया । हे लोमहर्षण ! अब… Read More