श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-16 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-षोडशोऽध्यायः सोलहवाँ अध्याय युधाजित् का भारद्वाजमुनि के आश्रम पर आना और उनसे मनोरमा को भेजने का आग्रह करना, प्रत्युत्तर में मुनि का ‘शक्ति हो तो ले जाओ’ – ऐसा कहना युधाजिद्‌भारद्वाजयोः संवादवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन् ! ]… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-15 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-पञ्चदशोऽध्यायः पन्द्रहवाँ अध्याय राजा युधाजित् और वीरसेन का युद्ध, वीरसेन की मृत्यु, राजा ध्रुवसन्धि की रानी मनोरमा का अपने पुत्र सुदर्शन को लेकर भारद्वाजमुनि के आश्रम में जाना तथा वहीं निवास करना मनोरमया भारद्वाजाश्रमं प्रति गमनम् व्यासजी बोले — [हे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-14 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-चतुर्दशोऽध्यायः चौदहवाँ अध्याय देवीमाहात्म्य से सम्बन्धित राजा ध्रुवसन्धि की कथा, ध्रुवसन्धि की मृत्यु के बाद राजा युधाजित् और वीरसेन का अपने-अपने दौहित्रों के पक्ष में विवाद युधाजिद्‌वीरसेनयोर्युद्धार्थं सज्जीभवनम् जनमेजय बोले — हे द्विज ! मैंने विष्णु द्वारा किये गये देवीयज्ञ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय देवी की आधारशक्ति से पृथ्वी का अचल होना तथा उस पर सुमेरु आदि पर्वतों की रचना, ब्रह्माजी द्वारा मरीचि आदि की मानसी सृष्टि करना, काश्यपी सृष्टि का वर्णन, ब्रह्मलोक, वैकुण्ठ, कैलास और स्वर्ग आदि का निर्माण; भगवान्… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय सात्त्विक, राजस और तामस यज्ञों का वर्णन; मानस यज्ञ की महिमा और व्यासजी द्वारा राजा जनमेजय को देवी-यज्ञ के लिये प्रेरित करना अम्बायज्ञविधिवर्णनम् राजा बोले — हे स्वामिन्‌! अब आप उन देवी के यज्ञ की विधि का… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय सत्यव्रत द्वारा बिन्दुहित सारस्वत बीजमन्त्र ‘ऐ-ऐ’ का उच्चारण तथा उससे प्रसन्‍न होकर भगवती का सत्यव्रत को समस्त विद्याएँ प्रदान करना सत्यव्रताख्यानवर्णनम् लोमश बोले — [हे जमदग्ने!] वह उतथ्य वेदाध्ययन, जप, ध्यान तथा देवताओं की आराधना आदि कुछ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय देवी के बीजमन्त्र की महिमा के प्रसंग में सत्यव्रत का आख्यान सत्यव्रताख्यानवर्णनम् जनमेजय बोले — वह द्विजश्रेष्ठ सत्यत्रत नामक ब्राह्मण कौन था, वह किस देश में पैदा हुआ था तथा कैसा था? यह मुझे बताइये ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय गुणों के परस्पर मिश्रीभाव का वर्णन, देवी के बीजमन्त्र की महिमा गुणानां गुणपरिज्ञानवर्णनम् नारदजी बोले — हे तात । आपने गुणों के लक्षणों का वर्णन किया, किंतु आपके मुख से निःसृत वाणीरूपी मधुर रस का पान करता… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण का वर्णन गुणानां रूपसंस्थानादिवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — हे तात! आपने जो मुझसे पूछा था, वह सृष्टि का वर्णन मैंने कर दिया। अब गुणों का स्वरूप कहता हूँ, उसे एकाग्रचित्त होकर सुनो ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय ब्रह्माजी के द्वारा परमात्मा के स्थूल और सूक्ष्म स्वरूप का वर्णन; सात्त्विक, राजस और तामस शक्ति का वर्णन; पंचतन्मात्राओं, ज्ञानेन्द्रियों, कर्मेन्द्रियों तथा पंचीकरण-क्रिया द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन तत्त्वनिरूपणवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — हे महाभाग! [नारद!] मैंने,… Read More