शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 34 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चौंतीसवाँ अध्याय चतुर्दश मन्वन्तरोंका वर्णन शौनक बोले – हे सूत ! आप सभी मन्वन्तरोंका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये, अबतक जितने भी मनु हुए हैं, उनका वर्णन मैं सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ सूतजी बोले- स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 33 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तैंतीसवाँ अध्याय मरुतोंकी उत्पत्ति, भूतसर्गका कथन तथा उनके राजाओंका निर्धारण सूतजी बोले- हे तात! यह सर्ग स्वारोचिष मन्वन्तरमें कहा गया है, वैवस्वत मन्वन्तरमें जब महान् वारुण यज्ञका विस्तार हुआ, उस समय ब्रह्मदेवद्वारा हवन करते समय जो सृष्टि हुई, उसका… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 32 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता बत्तीसवाँ अध्याय कश्यपकी पत्नियोंकी सन्तानोंके नामका वर्णन सूतजी बोले- अदिति, दिति, सुरसा, अरिष्टा, इला, दनु, सुरभि, विनता, ताम्रा, क्रोधवशा, खशा, कद्रू एवं मुनि – [ ये कश्यपकी पत्नियोंके नाम हैं] अब उनकी सन्तानोंके विषयमें मुझसे सुनिये | पूर्वके मन्वन्तरमें… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 31 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता इकतीसवाँ अध्याय दैत्य, गन्धर्व, सर्प एवं राक्षसोंकी सृष्टिका वर्णन तथा दक्षद्वारा नारदके शाप – वृत्तान्तका कथन शौनकजी बोले – हे सूतपुत्र ! आप देवगणों, दैत्यों, गन्धर्वों, सर्पों एवं राक्षसोंकी इस सृष्टिका वर्णन विस्तारपूर्वक करें ॥ १ ॥ सूतजी बोले-… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 30 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तीसवाँ अध्याय ब्रह्माद्वारा स्वायम्भुव मनु आदिकी सृष्टिका वर्णन सूतजी बोले- इस प्रकार [अयोनिज मानस ] प्रजाओंकी रचना हो जानेके पश्चात् आपव प्रजापति पुरुष अर्थात् मनुने अयोनिजा शतरूपा नामक पत्नी प्राप्त की। अपनी महिमासे द्युलोकको व्याप्त करके स्थित हुए मनुके… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 29 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता उनतीसवाँ अध्याय ब्रह्माकी आदिसृष्टिका वर्णन शौनक बोले- आपने परमार्थ प्रदान करनेवाला सनत्कुमार एवं व्यासजीका संवादरूप जो महान् आख्यान कहा, उसे मैंने सुन लिया । अब जिस प्रकार ब्रह्माकी सृष्टि उत्पन्न हुई, उसे मैं सुनना चाहता हूँ, जैसा आपने व्यासजीसे… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 28 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता अट्ठाईसवाँ अध्याय छायापुरुषके दर्शनका वर्णन देवी बोलीं- हे देवदेव ! हे महादेव ! आपने कालकी वंचना करनेवाले शब्दब्रह्मस्वरूप उत्तम योगके लक्षणका वर्णन संक्षेपसे किया । अब योगियोंके हितकी इच्छासे छायापुरुष-सम्बन्धी उस उत्तम ज्ञानको विस्तारपूर्वक कहिये ॥ १-२ ॥ शंकर… Read More


 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 27 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सत्ताईसवाँ अध्याय अमरत्व प्राप्त करनेकी चार यौगिक साधनाएँ देवी बोलीं- योगी योगाकाशसे उत्पन्न वायुपद कैसे प्राप्त करता है, हे प्रभो ! यदि आप मुझपर प्रसन्न हैं, तो यह सब मुझे बताइये ॥ १ ॥ शंकर बोले- [ हे देवि… Read More


 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 26 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता छब्बीसवाँ अध्याय योगियोंद्वारा कालकी गतिको टालनेका वर्णन देवी बोलीं- हे देव! आपने यथार्थरूपसे कालज्ञानका वर्णन किया, योगिजन जिस प्रकार कालका वंचन करते हैं, आप उसे विधिपूर्वक कहिये । काल सभी प्राणियोंके सन्निकट घूमता है, किंतु योगी आये हुए कालको… Read More


 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 25 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पच्चीसवाँ अध्याय मृत्युकाल निकट आनेके लक्षण व्यासजी बोले – हे सनत्कुमार! हे सर्वज्ञ ! हे मुने ! मैंने आपसे स्त्रियोंके स्वभावका वर्णन सुना, अब आप प्रेमपूर्वक मुझसे काल – ज्ञानका वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ सनत्कुमार बोले— हे व्यास… Read More