लक्ष्मी-प्राप्ति प्रयोग लक्ष्मी-प्राप्ति प्रयोग मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरु को । नमो सिद्ध गणपति-प्रसादात् विघ्न-हर्तु’ गणपत गणापत वसो मसाण । जो फल चीहुं, सो फल आण । पञ्च लाडूं, सिर सिन्दूर । रिद्धि-सिद्धि आण । गौरी का पुत्र सिंहासन बैठा । राजा कँपे, प्रजा कँपे । द्रष्टे राजा सिम चाँपे । पञ्च-कोष पूर्व-पश्चिम से आण । उत्तर… Read More
क्लेश निवारक शाबर मन्त्र क्लेश निवारक शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ग्लौम् गौरी-पुत्र, वक्रतुण्ड, गण-पति, गुरु, गणेश ! ग्लौम् गण-पतिं, ऋद्धि-पति, सिद्धि-पति ! मेरे कर दूर क्लेश ।।”… Read More
विघ्नों का निवारण विघ्नों का निवारण मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश । गुरु जी को आदेश । पहिला गण गणपती । चौदा विद्यांचा सारथी । जती सती कैलास- पती । बल भीम मारुती । आले विघ्न निवारी । साईं गोरखनाथ की द्वाही । गुरू की शक्ति – मेरी भक्ति । चले मन्त्र, ईश्वरी वाचा । पिण्ड कच्चा, गुरू गोरखनाथ… Read More
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत गणेश मन्त्र सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र मन्त्र :- “ॐ गुरू जी गनेपाइयाँ, रिद्धि-सिद्धि आइयाँ । रिद्धि-सिद्धि भरै भण्डार, कमी कछू की नाहीं । पीर-पैगम्बर औलिया- सबको राह बताई । हाथा तो हनुमन्त बसे, भैरो बसे कपाल । दो नैनन बिच, नाहर सिंह, मोह लीन संसार । बिन्द्रा लाव, सिन्दूर का सोहै माँग लिलार… Read More
अष्टा-विंशत्यक्षर वीरवर-गणपति अष्टा-विंशत्यक्षर वीरवर-गणपति मन्त्रः- “ह्रीं क्लीं वीर-वर-गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट् ।”… Read More
सर्वसिद्धिदायक साधना – श्रीउच्छिष्ट-गणेश कवच सर्व-सिद्धि-दायक साधना ॥ श्रीउच्छिष्ट-गणेश कवच ॥ ॥ देव्युवाच ॥ देवदेव जगन्नाथ सृष्टिस्थितिलयात्मक । विना ध्यानं विना मन्त्रं विना होमं विना जपम् ॥ १ ॥ येन स्मरणमात्रेण लभ्यते चाशु चिन्तितम् । तदेव श्रोतुमिच्छामि कथयस्व जगत्प्रभो ॥ २ ॥ देवी बोलीं — हे देवदेव, जगन्नाथ, सृष्टि-स्थिति तथा प्रलय करने वाले ! बिना ध्यान, बिना मन्त्र, बिना होम,… Read More
श्रीविष्णुकृतं गणेश स्तोत्रम् श्रीविष्णुकृतं गणेश स्तोत्रम् नारायण उवाच अथ विष्णुः सभामध्ये सम्पूज्य तं गणेश्वरम् । तुष्टाव परया भक्तया सर्वविघ्नविनाशकम् ।।१ श्रीविष्णुरुवाच ईश त्वां स्तोतुमिच्छामि ब्रह्मज्योतिः सनातनम् । निरुपितुमशक्तोऽहमनुरुपमनीहकम् ।।२ प्रवरं सर्वदेवानां सिद्धानां योगिनां गुरुम् । सर्वस्वरुपं सर्वेशं ज्ञानराशिस्वरुपिणम् ।।३… Read More
ब्रह्मणस्पती सूक्त ब्रह्मणस्पती सूक्त [ऋषि – कण्व धौर । देवता – ब्रह्मणस्पति । छन्द बाहर्त प्रगाध(विषमा बृहती, समासतो बृहती)।] उत्तिष्ठ ब्रह्मणस्पते देवयन्तस्त्वेमहे । उप प्र यन्तु मरुतः सुदानव इन्द्र प्राशूर्भवा सचा ॥१॥ हे ब्रह्मणस्पते! आप उठें, देवो की कामना करने वाले हम आपकी स्तुति करते है। कल्याणकारी मरुद्गण हमारे पास आयें। हे इन्द्रदेव। आप ब्रह्मणस्पति के साथ… Read More
ग्रह-बाधा, ज्वर-नाशक विघ्नेश-मन्त्र ग्रह-बाधा, ज्वर-नाशक विघ्नेश-मन्त्र “ॐ नमो गणपतये महा-वीर ! दश-भुज ! मदन-काल-विनाशन ! मृत्युं हन-हन, धम-धम, मथ-मथ, कालं संहर-संहर, सर्व-ग्रहांश्चूर्णय-चूर्णय, नागान् मोटय-मोटय, रुद्र-रुप त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख ! हुं फट्-स्वाहा ।।”… Read More
संसार-मोहक नाम श्रीगणेश-कवचम् संसार-मोहक नाम श्रीगणेश-कवचम् ।।पूर्व-पीठिकाः श्री नारायण उवाच।। विनायकस्य कवचं, सर्वापद्-विनिवारकम्। कथयामि महालक्ष्मी ! सर्व-लोकेषु शान्ति-कृत्।।१ कवचं विभ्रतां मृत्युर्न भिया याति सन्निधिम्। नाऽऽयुर्व्ययो नाशुभं च, ब्रह्माण्डे न पराजयः।।२… Read More