ज्योतिष और शाबर ज्योतिष और शाबर साधना-काल में जन्म-लग्न-चक्र के अनुसार ग्रहों की अनुकूलता जानना आवश्यक है। साधना भी एक प्रकार का कर्म है, अतः ‘दशम भाव’ उसकी सफलता या असफलता का सूचक है। साधना की प्रकृत्ति तथा सफलता हेतु पँचम, नवम तथा दशम भाव का अवलोकन उचित रहेगा। १॰ नवम स्थान में शनि हो तो साधक शाबर… Read More
ग्रह पीड़ा निवारक टोटके ग्रह पीड़ा निवारक टोटके- सूर्य १॰ सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए। २॰ रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए। ३॰ ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ… Read More
वस्त्र धारण तथा भविष्य वस्त्र धारण तथा भविष्य सामान्यतः वस्त्र सुन्दर एवं आकर्षक दिखने एवं अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली दिखाने हेतु धारण किए जाते हैं। रंग, आकृति एवं स्वरुप की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति की पसन्द भिन्न-भिन्न हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र मेम क्रमशः देव, मनुष्य एवं राक्षस गण होते हैं। इसके अतिरिक्त वास्तु शास्त्र में आठ दिशाओं तथा… Read More