॥ अथ शिव पञ्चाक्षरी मन्त्र प्रयोगः ॥ मन्त्र – (शारदायाम्) “नमः शिवाय” एवं षडाक्षरी ” ॐ नमः शिवाय” ऋष्यादि से विनियोग करके न्यास करें – विनियोगः- अस्य मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः, पंक्ति छन्द, ईशान देवता, ॐ बीजाय, नमः शक्तये, शिवायेति कीलकाय, सदाशिव प्रसन्नार्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- ॐ वामदेवर्षये नमः शिरसि । पंक्ति छन्दसे नमः मुखे… Read More


॥ शिव मानस पूजा ॥ रत्नैः कल्पितमासनं हिम-जलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नाना-रत्न-विभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनं । जाती-चम्पक-बिल्व-पत्र-रचितं पुष्पं च धूपं तथा, दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत-कल्पितं गृह्यताम् ॥ १ ॥… Read More


॥ श्रीशिवापराधक्षमापणस्तोत्रम् अथवा शिवापराधभञ्जनस्तोत्रम् ॥ आदौ कर्मप्रसङ्गात् कलयति कलुषं मातृकुक्षौ स्थितं मां विण्मूत्रामेध्यमध्ये क्वथयति नितरां जाठरो जातवेदाः । यद्यद्वै तत्र दुःखं व्यथयति नितरां शक्यते केन वक्तुं क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो ॥ १ ॥… Read More


॥ शिव पंचाक्षर स्तोत्र ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै ‘न’ काराय नमः शिवाय ॥ १ ॥ मन्दाकिनि-सलिलचन्दन-चर्चिताय नन्दीश्वर-प्रमथनाथ- महेश्वराय । मन्दारपुष्प-बहुपुष्प-सुपूजिताय तस्मै ‘म’ काराय नमः शिवाय ॥ २ ॥… Read More


॥ अथ श्री शिव महिम्न स्तोत्रम् ॥ [एक समय की बात है जब चित्ररथ नामक शिवभक्त राजा हुए जिन्होंने अपने राज्य में कई प्रकार के पुष्पों का एक उद्यान बनवाया, वह शिवपूजन के लिये पुष्प वहीं से ले जाते थे। महान् शिवभक्त गंधर्व पुष्पदंत देवराज इंद्र की सभा के मुख्य गायक थे, एक दिन उनकी… Read More


॥ श्रीशिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम् ॥ प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् । खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ १ ॥… Read More


भगवान् शिव को नमस्कार नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च । मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ॥ कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत भगवान् शिव को नमस्कार है । कल्याण के विस्तार करनेवाले तथा सुख के विस्तार करनेवाले भगवान् शिव को नमस्कार है । मंगलस्वरूप और मंगलमयता की सीमा भगवान् शिव… Read More


॥ अष्टमूर्तिस्तव अथवा मूर्त्यष्टकस्तोत्र ॥ संजीवनीविद्या प्रदान करनेवाली स्तुति महर्षि भृगु के वंश में उत्पन्न श्रीशुक्राचार्य महान् शिवभक्तों में परिगणित हैं । इन्होंने काशीपुरी में आकर एक शिवलिंग की स्थापना की, जो शुक्रेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ । भगवान् विश्वनाथ का ध्यान करते हुए इन्होंने बहुत कालतक घोर तप किया । उनकी उग्र तपस्या से… Read More


॥ भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ एकाक्षरीमंत्र – ‘हौं’ । हिन्दी तन्त्रसार में ऋषि वामदेव, छन्द पंक्ति, देवता सदाशिव कहे गये है । शारदा तिलक में ‘हं’ बीज औं’ शक्ति बतलाया गया है । एकाक्षर चिंतामणि – ‘क्ष्रौं’ । शारदा तिलक के अनुसार यह भगवान शिव के उत्तरवक्त्र से सम्बन्धित है । ऋषि काश्यप,… Read More


शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय श्रोताओं के पालन करने योग्य नियमों का वर्णन ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाप्राज्ञ धन्यस्त्वं शैवपुङ्‌गव । श्रावितेयं कथाऽस्माकमद्भुता च शुभावहा ॥ १ ॥ पुंसां शिवपुराणस्य श्रवणव्रतिनां मुने । सर्वलोकहितार्थाय दयया नियमं वद ॥ २ ॥… Read More