भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २६ व्यास जी बोले-पुराण पुरुष द्वारा उत्पन्न कल्कि देव दिव्यअश्व पर सुशोभित होकर खड्ग, चर्म के धारण पूर्वक उन दैत्यरूप म्लेच्छों का हनन करेंगे । तदुपरांत योग समाधिनिष्ठ होकर सोलह सहस्र वर्ष तक… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २५ व्यास जी बोले — कलि के चौथे चरण के आरम्भ होने पर मनुष्यों द्वारा अजीर्ण होने पर इक्कीस प्रधान नरकगण यमराज के यहाँ जाकर नमस्कार पूर्वक उनकी प्रार्थना की – धर्मराज को… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २४ सूत जी बोले — उसके पश्चात् सभी दैत्यों ने कलि को आगे कर जलयान द्वारा हरिखण्ड को प्रस्थान किया । वहाँ पहुँचने पर उस खण्ड के निवासी मनुष्यों ने जो देवतुल्य, महाबली,… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २३ सूत जी बोले — मुने ! बाईस सौ चौंसठ वर्ष विक्रम काल के व्यतीत होने पर भूत नन्दि नामक राजा ने उस समय उन धन-धान्य पूर्ण मौन वंशजों को, जिन्हें कुबेर के… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २२ अकबर आदि अन्तिम मुगल शासकों का चरित्र; तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, तानसेन तथा बीरबल आदि के पूर्वजन्मों का वृत्तान्त; गुरुण्ड, मौन और सर्वत्र म्लेच्छराज्य का विस्तार सूत जी बोले — दैत्यराज बलि ने… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २१ कण्व के उपाध्याय, दीक्षित तथा पाठक आदि दस पुत्रों की उत्त्पति तथा कृष्णचैतन्य का वर्णन सूत जी बोले — धीमान् जगन्नाथ की ऐसी बातें सुनकर प्रसन्न होकर कृष्णचैतन्य ने कहा — भगवन्… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २० जगन्नाथ माहात्म्य का वर्णन सूत जी बोले — एक बार शुद्धात्मा एवं शिव भक्ति में निमग्न रहने वाले भट्टोजि दीक्षित ने बीस वर्षीय कृष्ण चैतन्य के यहाँ जाकर नमस्कार पूर्वक उनसे कहा… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १९ कृष्णचैतन्य यज्ञांश शिष्य बलभद्र विष्णुस्वामी और मध्वाचार्य के वृत्तान्त का वर्णन सूत जी बोले — इस प्रकार देवों के माहात्म्य वर्णन करने के उपरान्त भगवान् बृहस्पति ने मुख द्वारा अपना अंश निकालकर… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १८ अशऽविनीकुमारों के अंश से सधन (सदन कसाई) और संत रैदास की समुत्पत्ति का वर्णन सूत जी बोले — भगवान बृहस्पति ने देवों से इस प्रकार की बातें कहकर पुनः अश्विनी कुमार की… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १७ संत कबीर, भक्त नरसी, पीपा, नानक तथा साधु नित्यानन्दजी के पूर्वजन्मों का वर्णन बृहस्पति जी बोले — सम्पूर्ण शक्ति सम्पन्न भगवान् विष्णु द्वारा उन दोनों भीषण पुत्रों के निधन होने पर दिति… Read More