श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय नारदजी के पूर्वचरित्र का शेष भाग श्रीसूतजी कहते हैं — शौनकजी ! देवर्षि नारद के जन्म और साधना की बात सुनकर सत्यवतीनन्दन भगवान् श्रीव्यासजी ने उनसे फिर यह प्रश्न किया ॥ १ ॥ श्रीव्यासजी ने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय भगवान् के यश-कीर्तन की महिमा और देवर्षि नारदजी का पूर्वचरित्र सूतजी कहते हैं — तदनन्तर सुखपूर्वक बैठे हुए वीणापाणि परम यशस्वी देवर्षि नारद ने मुसकराकर अपने पास ही बैठे ब्रह्मर्षि व्यासजी से कहा ॥ १… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय महर्षि व्यासका असन्तोष व्यासजी कहते हैं — उस दीर्घकालीन सत्र  में सम्मिलित हुए मुनियों में विद्या-वयोवृद्ध कुलपति… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय भगवान् के अवतारों का वर्णन श्रीसूतजी कहते हैं — सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोक के निर्माण की इच्छा की । इच्छा होते ही उन्होंने महत्तत्त्व आदि से निष्पन्न पुरुषरूप ग्रहण किया । उसमें… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय भगवत्कथा और भगवद्भक्ति का माहात्म्य श्रीव्यासजी कहते हैं — शौनकादि ब्रह्मवादी ऋषियों के ये प्रश्न सुनकर रोमहर्षण के पुत्र उग्रश्रवा को बड़ा ही आनन्द हुआ । उन्होंने ऋषियोंके इस मङ्गलमय प्रश्न का अभिनन्दन करके कहना… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्न ॥ मङ्गलाचरण ॥ जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतः चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट् । तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत् सूरयः । तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा । धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं… Read More


श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ५ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् सप्ताहयज्ञकी विधि श्रीसनकादि कहते हैं — नारदजी ! अब हम आपको सप्ताहश्रवण की विधि बताते हैं । यह विधि प्रायः लोगों की सहायता और धन से साध्य कही गयी है ॥ १ ॥ पहले तो यत्नपूर्वक ज्योतिषी को बुलाकर मुहूर्त पूछना चाहिये तथा… Read More


श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ५ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् धुन्धुकारी को प्रेतयोनि की प्राप्ति और उससे उद्धार सूतजी कहते हैं — शौनकजी ! पिता के वन चले जानेपर एक दिन धुन्धुकारी ने अपनी माता को बहुत पीटा और कहा — ‘बता, धन कहाँ रखा है ? नहीं तो अभी तेरी लुआठी (जलती… Read More


श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् गोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ सूतजी कहते हैं — मुनिवर ! उस समय अपने भक्तों के चित्त में अलौकिक भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ देख भक्तवत्सल श्रीभगवान् अपना धाम छोड़कर वहाँ पधारे ॥ १ ॥ उनके गले में वनमाला शोभा पा रही थी, श्रीअङ्ग सजल जलधर के… Read More


श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् भक्ति के कष्ट की निवृत्ति नारदजी कहते हैं — अब मैं भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को स्थापित करने के लिये प्रयत्नपूर्वक श्रीशुकदेवजी के कहे हुए भागवतशास्त्र को कथा द्वारा उज्ज्वल ज्ञानयज्ञ करूँगा ॥ १ ॥ यह यज्ञ मुझे कहाँ करना चाहिये, आप इसके… Read More