भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १५ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १५ सूत जी बोले-इन्दुल के स्वर्ग चले जाने पर वीरगणों ने शोक से दुःखी होकर समस्त लोकों में निवास करने वाली श्री शारदा देवी जी की पूजा की । प्रेम में मग्न… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १४ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १४ सूत जी बोले-उदयसिंह की चौदह वर्ष की अवस्था में जो कुछ हुआ है, मैं बता रहा हूँ, सुनो ! इन्द्र-पुत्र जयन्त ने जानकी जी के शाप द्वारा कलि में जन्म ग्रहण… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १३ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १३ ऋषियों ने कहा — मुने ! इन दोनों माहिष्मती एवं महावती (महोबा) वालों का आपस में किस मास में कितने दिनों तक युद्ध होता रहा । पश्चात् अपनी राजधानी में पहुँचकर… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १२ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १२ सूत जी बोले — उदय सिंह के बारहवें वर्ष की अवस्था में जो कुछ हुआ मैं कह रहा हूँ, सुनो — कान्यकुब्ज (कन्नौज) नामक राजधानी में आश्विन शुक्ल दशमी के दिन… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ११ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ११ सूत जी बोले— उस विष्णु की शक्ति के अवतार— उदयसिंह के दशवें वर्ष की अवस्था के आरम्भ में एक दिन राजकुमारों ने वसन्त ऋतु के रमणीक आगमन में आनन्द का अनुभव… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १० भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १० मनोरथ, कराल, मेघपुष्प और बलाहक नामक चार घोड़ों की उत्त्पति सूत जी बोले — नवे वर्ष के आरम्भ में वह सबल कृष्णांश (उदयसिंह) राजनीति विद्या, चौंसठ कलाओं और धर्मशास्त्र में निपुणता… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ९ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ९ कृष्णांश ‘आह्लाद’ (आल्हा) का जन्म सूत जी बोले — राज-सेवक दोनों भाइयों ने कालिय (करिया) को पराजित करके गोपालक राज्य के अधीश्वर राजा दलवाहन के यहाँ प्रस्थान किया । वहाँ सहस्र… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ८ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ८ सहदेव अंश देवसिंह का जन्म सूत जी बोले — जम्बूक नामक राजा ने भयभीत होकर अपने पुत्र कालिय (करिया) को साथ लेकर नर्मदा के तट पर देवाधिदेव पिनाकपाणि शिव की आराधना… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ७ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ७ राजागणों द्वारा अपने इष्टदेवों की आराधना सूत जी बोले — भीष्मसिंह ने गंगा जी के तट पर इन्द्र की पूजा करना आरम्भ किया । पश्चात् इन्द्र को सूर्यमय जानकर तप द्वारा… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ६ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ६ संयोगिनी का अपहरण सूत जी बोले — एक बार रत्नभानु (रतीमान्) ने पृथ्वीराज के राज्य के दक्षिणी प्रदेश पर विजय प्राप्तकर उसके कोष (खजाने) का अपहरण कर लिया था । उसे… Read More