भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ५ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ५ पृथ्वीराज व जयचन्द्र सूत जी बोले — इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली) के राजा अनंगपाल ने पुत्रार्थ (पुत्रेष्टि नामक) यज्ञ का सविधान अनुष्ठान आरम्भ किया । भगवान् शिव की प्रसन्नता से चन्द्रकान्ति और कीर्तिमालिनी,… Read More
कालीदास कृत प्रत्यङ्गिरा मालामन्त्र ॥ कालीदास कृत प्रत्यङ्गिरा मालामन्त्र ॥ Pratyangira Mala Mantra ॥ ॐ नमः शिवाये ॥ ॥ श्री भैरव उवाच ॥ ” निवसति करवीरे सर्वदाया श्मशाने विनत-जन हिताय प्रेत-रूढे महेशो हि मकर हिम-शुभ्रां पञ्च-वक्त्राम्-माद्यांदिशतु-दश-भुजाया सा श्रियं सिद्धि-लक्ष्मीः ॥ ऐं ख्फ्रे जय जय जगदम्ब प्रणत-हरिहर हिरण्य-गर्भ ।… Read More
बृहत्साम ॥ बृहत्साम ॥ भगवान् श्रीकृष्ण ने वेदों में सामवेदको अपनी विभूति बताया है – ‘वेदानां सामवेदोऽस्मि’ (गीता १०।२२) । सामवेद में अनेक मनोहारी गीत हैं, जिन्हें ‘साम’ कहा जाता है। यथा – रथन्तरसाम, वार्षसाम, बृहत्साम, सेतुसाम, वीङ्कसाम, कल्माषसाम, आज्यदोहसाम, ज्येष्ठसाम इत्यादि। इनका गायन एक विशिष्ट परम्परागत वैदिक पद्धति से किया जाता है, जो अत्यन्त मनोहारी… Read More
अग्निसूक्त ॥ अग्निसूक्त ॥ ॥ अग्निसूक्त (क) ॥ इस सूक्त के ऋषि वैश्वामित्र मधुच्छन्दा हैं, देवता अग्नि हैं तथा छन्द गायत्री है । वेद में अग्निदेवता का विशेष महत्व है । ऋग्वेदसंहिता में दो सौ सूक्त अग्नि के स्तवन में प्राप्त हैं । ऋग्वेद के सभी मण्डलों के आदि में ‘अग्निसूक्त’ के अस्तित्व से इस देव… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ४ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ४ देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओं का आविर्भाव सूतजी ने कहा — भोजराज के स्वर्गारोहण के पश्चात् उनके वंश में सात राजा हुए, किंतु अल्पायु होने के नाते उन भाग्यहीनों का राजकाल… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ३ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ३ राजा भोज और महामद की कथा सूतजी ने कहा — शालिवाहन के वंश में दश राजाओं ने क्रमशः जन्म ग्रहणकर पाँच सौ वर्ष तक राज्य का उपभोग किया है । पश्चात्… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय २ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – २ राजा शालिवाहन तथा ईशामसीह की कथा सूतजीने कहा — ऋषियों ! प्रातःकाल में पुत्रशोक से पीड़ित सभी पाण्डव प्रेतकार्य कर पितामह भीष्म के पास आये । उनसे उन्होंने राजधर्म, मोक्षधर्म और… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १ आल्हा-खण्ड (आल्हा-ऊदल की कथा) का उपक्रम विशेषः- भविष्यपुराण के प्रतिसर्गपर्व का तीसरा खण्ड रामांश और कृष्णांश अर्थात् आल्हा और ऊदल (उदयसिंह)- के चरित्र जयचन्द्र एवं पृथ्वीराज चौहान की वीरगाथाओं से परिपूर्ण… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३५ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ३५ श्रीदुर्गासप्तशती के उत्तरचरित्र की महिमा के प्रसंग में योगाचार्य महर्षि पतञ्जलि का चरित्र सूतजी बोले — अनेक धातुओं के द्वारा चित्रित रमणीय चित्रकूट पर्वतपर महाविद्वान् उपाध्याय पतञ्जलि मुनि रहते थे ।… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३४ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ३४ श्रीदुर्गासप्तशती के मध्यमचरित्र का माहात्म (कात्यायन तथा मगध के राजा महानंद की कथा) सूतजी बोले — शौनक ! उज्जयिनी नगरी में एक हिंसापरायण मद्य-मांस-भक्षी भीमवर्मा नाम का क्षत्रिय रहता था ।… Read More