सीता, राम ही की थाती है सीता, राम ही की थाती है बोले वशिष्ठ, सुनिये मान्यवर विदेहराज, याचक प्रतीक्षा करैं, कहाँ मेरे दानी हैं । सुतन समेत ठाढ़े द्वारे दशरथ आज, कैसे विलम्ब होत, अँखियाँ टकटकानी हैं ।।… Read More
श्रीसूक्तः साधना के आयाम श्रीसूक्तः साधना के आयाम ‘श्री-सूक्त’ में 15 ऋचाएँ है । यह सूक्त ऋग्वेद संहिता के अष्टक 4, अध्याय 4, वर्ण के अन्तिम मण्डल 5 के अन्त में ‘परिशिष्ट’ के रुप में आया है । इसी को ‘खिल-सूक्त’ भी कहते हैं । निरुक्त एवं शौनक आदि ने भी इसका उल्लेख किया है । ‘खिल’ शब्द का… Read More
श्रीसूक्त के प्रयोग श्रीसूक्त के प्रयोग १॰ “श्रीं ह्रीं क्लीं।।हिरण्य-वर्णा हरिणीं, सुवर्ण-रजत-स्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आवह।। श्रीं ह्रीं क्लीं” सुवर्ण से लक्ष्मी की मूर्ति बनाकर उस मूर्ति का पूजन हल्दी और सुवर्ण-चाँदी के कमल-पुष्पों से करें। फिर सुवासिनी-सौभाग्यवती स्त्री और गाय का पूजन कर, पूर्णिमा के चन्द्र में अथवा पानी से भरे हुए कुम्भ में श्रीपरा-नारायणी… Read More
श्रीसूक्त-विधान “श्रीसूक्त”-विधान विनियोगः- ॐ हिरण्य – वर्णामित्यादि-पञ्चदशर्चस्य श्रीसूक्तस्याद्यायाः ऋचः श्री ऋषिः तां म आवहेति चतुर्दशानामृचां आनन्द-कर्दम-चिक्लीत-इन्दिरा-सुताश्चत्वारः ऋचयः, आद्य-मन्त्र-त्रयाणां अनुष्टुप् छन्दः, कांसोऽस्मीत्यस्याः चतुर्थ्या वृहती छन्दः, पञ्चम-षष्ठयोः त्रिष्टुप् छन्दः, ततोऽष्टावनुष्टुभः, अन्त्या प्रस्तार-पंक्तिः छन्दः । श्रीरग्निश्च देवते । हिरण्य-वर्णां बीजं । “तां म आवह जातवेद” शक्तिः । कीर्तिसमृद्धिं ददातु मे” कीलकम् । मम श्रीमहालक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More
श्री कृष्ण शलाका प्रश्नावली श्री कृष्ण शलाका प्रश्नावली Shri_Krishan_Shalaka_questionnaire मि भ म ह हो अ त वि कि क का मि लि ा न रि इ स न धि ये ह म ल ह गि अ इ ह फ म वि सु ध न त हि तु नु च्छा हु ल न धा कृ र्म हो न तु म्हा… Read More
सुन्दर काण्ड का अद्भुत अनुष्ठान सुन्दर काण्ड का अद्भुत अनुष्ठान इस अनुष्ठान से सभी प्रकार की मनोकामनाएँ निश्चय ही पूर्ण होती है । अनेक व्यक्तियों द्वारा यह अनुभूत है । सर्वप्रथम अपने पूजा स्थान में श्रीहनुमान जी का एक सुन्दर चित्र विधि-वत् प्रतिष्ठित कर लें । उस चित्र के सम्मुख दीपक एवं धूपबत्ती जलाकर रखें । चित्र का यथा-शक्ति भक्ति-भाव… Read More
स्वरशास्त्रानुसार निवास स्थान का चयन स्वरशास्त्रानुसार निवास स्थान का चयन स्वरशास्त्रानुसार किसी व्यक्ति के निवास के लिये उपयुक्त नगर और उसकी दिशा का चयन करते हैं। सबसे पहले हम निवास के लिये उपयुक्त नगर के चयन को लेते हैं। नगर का चयन दो प्रकार से किया जाता है। १॰ नगर और व्यक्ति की नामराशियों से। २॰ नगर और व्यक्ति की… Read More
सर्व-यंत्र-मन्त्र-तंत्रोत्कीलन-स्तोत्र सर्व-यंत्र-मन्त्र-तंत्रोत्कीलन-स्तोत्र ।। पार्वत्युवाच ।। देवेश परमानन्द, भक्तानाम भयं प्रद ! आगमाः निगमाश्चैव, बीजं बीजोदयस्तथा ।।१।। समुदायेन बीजानां, मन्त्रो मंत्रस्य संहिता । ऋषिच्छन्दादिकं भेदो, वैदिकं यामलादिकम् ।।२।। धर्मोऽधर्मस्तथा ज्ञानं, विज्ञानं च विकल्पन । निर्विकल्प-विभागेन, तथा षट्-कर्म-सिद्धये ।।३।। भुक्ति-मुक्ति-प्रकारश्च, सर्वं प्राप्तं प्रसादतः । कीलनं सर्व-मन्त्राणां, शंसयद् हृदये वचः ।।४।। इति श्रुत्वा शिवा-नाथः, पार्वत्या वचनं शुभम् । उवाच… Read More
यात्रा से जुड़े शकुन यात्रा से जुड़े शकुन ‘यथा सुराणां प्रवरो मुरारिर्गंगा नदीनां द्विपदां च विप्रः । तथा प्रधानः शकुनः प्रदिष्टो वाक्यम्भवो गर्ग पराशराद्यैः ।।’ जिस प्रकार सभी देवताओं में विष्णु श्रेष्ठ है, नदियों में गंगा श्रेष्ठ है, सभी द्विपदों में ब्राह्मण श्रेष्ठ है, उसी प्रकार ‘शकुन’ भी सब सूचक पदार्थों में प्रधान है । यह गर्ग, पाराशर आदि… Read More
शंकराचार्य परम्परा अध्यात्म परम्परा १ ॐ गुरु जी प्रथमे उत्पत्ति आद्य शून्य, २ आद्य शून्य से अनादि शून्य, ३ अनादि शून्य से योगाशून्य, ४ योगाशून्य से महा-शून्य, ५ महा-शून्य से निरा शून्य, ६ निरा शून्य से आत्म-शून्य, ७ आत्म-शून्य से प्रमाल-शून्य, ८ प्रमाल-शून्य से चेतन-शून्य, ९ चेतन-शून्य से अजोड़ी शून्य, १० अजोड़ी शून्य से ओङ्कार, ११ ओङ्कार… Read More