श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-025 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पच्चीसवाँ अध्याय कुमार सनक तथा सनन्दन द्वारा की गयी विनायक-स्तुति, उनके द्वारा काशी में गणेशकुण्ड का निर्माण तथा मन्दिर बनाकर उसमें वरदविनायक नामक विनायक – मूर्ति की प्रतिष्ठा, भक्ति की महिमा अथः पञ्चविंशतितमोऽध्यायः बालचरिते भक्तिप्रशंसा कथनं सनक-सनन्दन बोले — आप सभी कारणों के कारण और कारणों से अतीत हैं। आप… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-024 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौबीसवाँ अध्याय काशीनगरी में विनायक के द्वारा एक ही समय में अनेक घरों में भोजनादि सम्पन्न करना तथा सनक- सनन्दन को अपने विविध स्वरूपों का दर्शन कराकर विवेकज्ञान की प्राप्ति कराना अथः चतुर्विंशतितमोऽध्यायः विनायक भोजनकथनं ब्रह्माजी बोले — काशीनगरी के समस्त लोग पूजा की सामग्री तथा अनेक प्रकार की भोजन-सामग्री… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-023 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तेईसवाँ अध्याय कुमार सनक तथा सनन्दन का बालक विनायक के दर्शन के लिये काशीनरेश की सभा में आना, बालक विनायक का शुक्ल नामक ब्राह्मण के घर में उसका आतिथ्य स्वीकार करने जाना तथा शुक्ल-दम्पती को विविध वरों की प्राप्ति अथः त्रयोविंशतितमोऽध्यायः बालचरिते शुक्लवर प्रदानं ब्रह्माजी बोले — वे बालक विनायक… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-022 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बाईसवाँ अध्याय काशीनगरी के निवासियों तथा शुक्ल नामक ब्राह्मण द्वारा विनायक को अपने-अपने घर ले जाने के लिये राजा से प्रार्थना करना और स्वीकृति प्राप्तकर विनायक के स्वागत की तैयारी करना अथः द्वाविंशतितमोऽध्यायः बालचरिते विद्रुमाशुक्लनिष्ठगणेशभक्तिनिरुपणं ब्रह्माजी बोले — दूसरे दिन की बात है, जब काशीनरेश प्रातःकालीन स्नान-सन्ध्या आदि नित्यकर्मों में… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-022 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बाईसवाँ अध्याय काशीनगरी के निवासियों तथा शुक्ल नामक ब्राह्मण द्वारा विनायक को अपने-अपने घर ले जाने के लिये राजा से प्रार्थना करना और स्वीकृति प्राप्तकर विनायक के स्वागत की तैयारी करना अथः द्वाविंशतितमोऽध्यायः बालचरिते विद्रुमाशुक्लनिष्ठगणेशभक्तिनिरुपणं ब्रह्माजी बोले — दूसरे दिन की बात है, जब काशीनरेश प्रातःकालीन स्नान-सन्ध्या आदि नित्यकर्मों में… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-021 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इक्कीसवाँ अध्याय भ्रमरा राक्षसी का अदिति का रूप धारणकर बालक विनायक के पास आना, बालक विनायक द्वारा उसका वध, देवताओं आदि के द्वारा विनायक की स्तुति अथः एकविंशतितमोऽध्यायः बालचरिते राक्षसीवध ब्रह्माजी बोले — हे द्विज व्यासजी ! मेरे द्वारा कहे जाने वाले बालक विनायक के महान् आश्चर्यजनक चरित्र का आप… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-020 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बीसवाँ अध्याय बालक विनायक की बाललीला के सन्दर्भ में विनायक द्वारा अम्भासुर आदि तीन दैत्यों के वध का वर्णन अथः विंशतितमोऽध्यायः बालचरिते दैत्यत्रयवध व्यासजी बोले — हे चतुर्मुख ब्रह्माजी ! हे ब्रह्मन् ! हे भगवन्! काशिराज के घर में उनके पुत्र का विवाह कब सम्पन्न हुआ, उसे आप मुझे विस्तार… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-019 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उन्नीसवाँ अध्याय विनायक की बाललीला के प्रसंग में दैत्य नरान्तक द्वारा दो दैत्यों कूप तथा कन्दर को काशीनगरी में भेजना, कूप का कुआँ और मेढक बनकर तथा कन्दर का बालक बनकर विनायक को मारने का प्रयत्न करना, विनायक द्वारा लीलापूर्वक दोनों का परस्पर वध कराना अथः एकोनविंशतितमोऽध्यायः कूपकन्दरवध ब्रह्माजी बोले… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-018 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अठारहवाँ अध्याय बालक विनायक के बालचरित के वर्णन-प्रसंग में एक दैत्य का ज्योतिषी बनकर काशिराज के दरबार में आना और विनायक द्वारा उसका वध अथः अष्टादशोऽध्यायः बालचरिते कपटि दैत्यवध व्यासजी बोले — हे लोकेश्वर ! दूसरा दिन हो जाने पर कौन-सी बात हुई, उसे मुझे बताइये, सुनते हुए भी मैं… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-017 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्रहवाँ अध्याय काशिराज तथा गजाननभक्त मुनि भ्रूशुण्डी को विनायक द्वारा अपने यथार्थ स्वरूप का दर्शन कराना, विनायक के ‘आशापूरक’ नाम की प्रसिद्धि अथः सप्तदशोऽध्यायः बालचरित ब्रह्माजी बोले — सर्वज्ञ होने पर भी विनायकदेव ने मुनि भ्रूशुण्डी के आश्रम से वापस आये हुए नृपश्रेष्ठ काशिराज से मेघ के समान गम्भीर वाणी… Read More