श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय वामन भगवान् का प्रकट होकर राजा बलि की यज्ञशाला में पधारना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस प्रकार जब ब्रह्माजी ने भगवान् की शक्ति और लीला की स्तुति की, तब जन्म-मृत्युरहित भगवान् अदिति के सामने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय भगवान् का प्रकट होकर अदिति को वर देना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अपने पतिदेव महर्षि कश्यपजी का उपदेश प्राप्त करके अदिति ने बड़ी सावधानी से बारह दिन तक इस व्रत का अनुष्ठान किया ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय कश्यपजी के द्वारा अदिति को पयोव्रत का उपदेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवता इस प्रकार भागकर छिप गये और दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया; तब देवमाता अदिति को बड़ा दुःख हुआ… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय राजा बलि की स्वर्ग पर विजय राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! श्रीहरि स्वयं ही सबके स्वामी हैं । फिर उन्होंने दीन-हीन की भाँति राजा बलि से तीन पग पृथ्वी क्यों माँगी ? तथा जो… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय मनु आदि के पृथक्-पृथक् कर्मों का निरूपण राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपके द्वारा वर्णित ये मनु, मनुपुत्र, सप्तर्षि आदि अपने-अपने मन्वन्तर में किसके द्वारा नियुक्त होकर कौन-कौन-सा काम किस प्रकार करते हैं यह… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय आगामी सात मन्वन्तरों का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! विवस्वान् के पुत्र यशस्वी श्राद्धदेव ही सातवें (वैवस्वत) मनु हैं । यह वर्तमान मन्वन्तर ही उनका कार्यकाल है । उनकी सन्तान का वर्णन मैं करता… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय मोहिनी रूप को देखकर महादेवजी का मोहित होना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् शङ्कर ने यह सुना कि श्रीहरि ने स्त्री का रूप धारण करके असुरों को मोहित कर लिया और देवताओं को… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय देवासुर संग्राम की समाप्ति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! परम पुरुष भगवान् को अहेतुकी कृपा से देवताओं की घबराहट जाती रही, उनमें नवीन उत्साह का सञ्चार हो गया । पहले इन्द्र, वायु आदि देवगण रणभूमि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय देवासुर-संग्राम श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! यद्यपि दानवों और दैत्यों ने बड़ी सावधानी से समुद्रमन्थन की चेष्टा की थी, फिर भी भगवान् से विमुख होने के कारण उन्हें अमृत की प्राप्ति नहीं हुई ॥ १… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय मोहिनी रूप से भगवान् के द्वारा अमृत बाँटा जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! असुर आपस के सद्भाव और प्रेम को छोड़कर एक-दूसरे की निन्दा कर रहे थे और डाकू की तरह एक-दूसरे के हाथ… Read More