अग्निपुराण – अध्याय 296 अग्निपुराण – अध्याय 296 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छियानबेवाँ अध्याय पञ्चाङ्ग-रुद्रविधान पञ्चाह्गरुद्रविधानम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं ‘पञ्चाङ्ग रुद्र-विधान ‘का वर्णन करता हूँ। यह परम उत्तम तथा सब कुछ प्रदान करने वाला है। ‘शिवसंकल्प’ इसका हृदय, ‘पुरुष सूक्त‘ शीर्ष, ‘अद्भ्यः सम्भूतः० (यजु० ३१ ।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 295 अग्निपुराण – अध्याय 295 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पंचानबेवाँ अध्याय दष्ट-चिकित्सा दष्टचिकित्साः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं मन्त्र, ध्यान और ओषधि के द्वारा साँप के द्वारा डॅसे हुए मनुष्य की चिकित्सा का वर्णन करता हूँ। ‘ॐ नमो भगवते नीलकण्ठाय’ इस मन्त्र के जप से… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 294 अग्निपुराण – अध्याय 294 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौरानबेवाँ अध्याय नाग-लक्षण [^1] नागलक्षणानिः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं नागों की उत्पत्ति, सर्पदंश में अशुभ नक्षत्र आदि, सर्पदंश के विविध भेद, देश के स्थान, मर्मस्थल, सूतक और सर्पदष्ट मनुष्य की चेष्टा — इन सात… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 293 अग्निपुराण – अध्याय 293 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिरानबेवाँ अध्याय मन्त्र-विद्या मन्त्रपरिभाषा: अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली मन्त्र विद्या का वर्णन करता हूँ, ध्यान देकर उसका श्रवण कीजिये। द्विजश्रेष्ठ। बीस से अधिक अक्षरों वाले मन्त्र ‘मालामन्त्र’ दस से… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 292 अग्निपुराण – अध्याय 292 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बानबेवाँ अध्याय गवायुर्वेद गवायुर्वेदः धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत ! राजा को गौओं और ब्राह्मणों का पालन करना चाहिये। अब मैं ‘गोशान्ति ‘ का वर्णन करता हूँ। गौएँ पवित्र एवं मङ्गलमयी हैं। गौओं में सम्पूर्ण लोक प्रतिष्ठित है।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 291 अग्निपुराण – अध्याय 291 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इक्यानबेवाँ अध्याय गज-शान्ति गज-शान्तिः शालिहोत्र कहते हैं — मैं गजरोगों का प्रशमन करने वाली गज-शान्ति के विषय में कहूँगा। किसी भी शुक्ला पञ्चमी को विष्णु, लक्ष्मी तथा नागराज ऐरावत की पूजा करे। फिर ब्रह्मा, शिव, विष्णु इन्द्र, कुबेर,… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 290 अग्निपुराण – अध्याय 290 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ नब्बेवाँ अध्याय अश्व-शान्ति अश्व-शान्ति शालिहोत्र कहते हैं — सुश्रुत! अब मैं घोड़ों के रोगों का मर्दन करने वाली ‘अश्वशान्ति’ का वर्णन करूंगा; जो नित्य, नैमित्तिक और काम्य के भेद से तीन प्रकार की मानी गयी है; इसे सुनो।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 289 अग्निपुराण – अध्याय 289 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ नवासीवाँ अध्याय अश्वचिकित्सा अश्वचिकित्सा शालिहोत्र कहते हैं — सुश्रुत अब मैं अश्वों के लक्षण एवं चिकित्सा का वर्णन करता हूँ। जो अश्व हीनदन्त, विषमदन्तयुक्त या बिना दाँत का, कराली (दो से अधिक दन्तपङ्क्तियों से युक्त, कृष्णतालु, कृष्णवर्ण की… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 288 अग्निपुराण – अध्याय 288 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अठासीवाँ अध्याय अश्ववाहन-सार अश्ववाहनसारः भगवान् धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत। अब मैं अश्ववाहन का रहस्य और अश्वों की चिकित्सा का वर्णन करूँगा। धर्म, कर्म और अर्थ की सिद्धि के लिये अश्वों का संग्रह करना चाहिये। घोड़े के ऊपर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 287 अग्निपुराण – अध्याय 287 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्तासीवाँ अध्याय गज चिकित्सा का कथन गज चिकित्साः पालकाप्य ने कहा — लोमपाद ! मैं तुम्हारे सम्मुख हाथियों के लक्षण और चिकित्सा का वर्णन करता हूँ। लम्बी सूँड़वाले, दीर्घ श्वास लेनेवाले, आघात को सहन करने में समर्थ, बीस… Read More