अग्निपुराण – अध्याय 206 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छठा अध्याय अगस्त्य के उद्देश्य से अर्घ्यदान एवं उनके पूजन का कथन अगस्त्यार्घ्यदानकथनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! महर्षि अगस्त्य साक्षात् भगवान् विष्णु के स्वरूप हैं। उनका पूजन करके मनुष्य श्रीहरि को प्राप्त कर लेता है। जब… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 205 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पाँचवाँ अध्याय भीष्मपञ्चकव्रत भीष्मपञ्चकव्रतं अग्निदेव कहते हैं — अब मैं सब कुछ देनेवाले व्रतराज ‘भीष्मपञ्चक’ के विषय में कहता हूँ। कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी को यह व्रत ग्रहण करे। पाँच दिनों तक तीनों समय स्नान करके पाँच तिल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 204 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चारवाँ अध्याय मासोपवास-व्रत का वर्णन मासोपवासव्रतं अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ ! अब मैं तुम्हारे सम्मुख सबसे उत्तम मासोपवास- व्रत का वर्णन करता हूँ। वैष्णव यज्ञ का अनुष्ठान करके, आचार्य की आज्ञा लेकर, कृच्छ्र आदि व्रतों से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 203 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तीनवाँ अध्याय नरकों का वर्णन नरकस्वरूपम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं नरकों का वर्णन करता हूँ। भगवान् श्रीविष्णु का पुष्पादि उपचारों से पूजन करनेवाले नरक को नहीं प्राप्त होते। आयु के समाप्त होने पर मनुष्य… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 202 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ दोवाँ अध्याय देवपूजा के योग्य और अयोग्य पुष्प पुष्पाध्यायकथनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! भगवान् श्रीहरि पुष्प, गन्ध, धूप, दीप और नैवेद्य के समर्पण से ही प्रसन्न हो जाते हैं। मैं तुम्हारे सम्मुख देवताओं के योग्य एवं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 201 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ एकवाँ अध्याय नवव्यूहार्चन नवव्यूहार्चनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं नवव्यूहार्चन की विधि बताऊँगा, जिसका उपदेश भगवान् श्रीहरि ने नारदजी के प्रति किया था। पद्ममय मण्डल बीच में ‘अं’ बीज से युक्त वासुदेव की पूजा करे (यथा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 200 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौवाँ अध्याय दीपदान – व्रत की महिमा एवं विदर्भराजकुमारी ललिता का उपाख्यान दीपदानव्रतं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले ‘दीपदान व्रत ‘का वर्णन करता हूँ। जो मनुष्य देवमन्दिर अथवा ब्राह्मण के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 199 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ निन्यानबेवाँ अध्याय ऋतु, वर्ष, मास, संक्रान्ति आदि विभिन्न व्रतों का वर्णन नानाव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आपके सम्मुख ऋतु सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ, जो भोग और मोक्ष को सुलभ करनेवाले हैं। जो… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 198 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अट्ठानबेवाँ अध्याय मास सम्बन्धी व्रत मासव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ! अब मैं मास व्रतों का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले हैं। आषाढ़ से प्रारम्भ होने वाले चातुर्मास्य में अभ्यङ्ग (मालिश और उबटन) – का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 197 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सत्तानबेवाँ अध्याय दिन-सम्बन्धी व्रत दिवसव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं दिवस-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। सबसे पहले ‘धेनुव्रत’ के विषय में बतलाता हूँ। जो मनुष्य विपुल स्वर्णराशि के साथ उभयमुखी गौ का दान करता… Read More