अग्निपुराण – अध्याय 196 अग्निपुराण – अध्याय 196 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छियानबेवाँ अध्याय नक्षत्र सम्बन्धी व्रत नक्षत्रव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं नक्षत्र-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। नक्षत्र विशेष में पूजन करने पर श्रीहरि अभीष्ट मनोरथ की पूर्ति करते हैं। सर्वप्रथम नक्षत्र – पुरुष श्रीहरि… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 195 अग्निपुराण – अध्याय 195 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पंचानबेवाँ अध्याय वार-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन वारव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले वार-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। जब रविवार को हस्त अथवा पुनर्वसु नक्षत्र का योग हो, तब पवित्र… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 194 अग्निपुराण – अध्याय 194 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौरानबेवाँ अध्याय अशोकपूर्णिमा आदि व्रतों का वर्णन अशोकपूर्णिमादिव्रतं अग्निदेव कहते हैं — अब मैं ‘अशोकपूर्णिमा के विषय में कहता हूँ। फाल्गुन के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को भगवान् वराह और भूदेवी का पूजन करे। एक वर्ष ऐसा करने से… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 193 अग्निपुराण – अध्याय 193 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरानबेवाँ अध्याय शिवरात्रि व्रत शिवरात्रिव्रतम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले ‘शिवरात्रि व्रत’ का वर्णन करता हूँ; एकाग्रचित्त से उसका श्रवण करो। फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनुष्य कामनासहित उपवास… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 192 अग्निपुराण – अध्याय 192 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बानबेवाँ अध्याय चतुर्दशी-सम्बन्धी व्रत चतुर्दशीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं चतुर्दशी तिथि को किये जानेवाले व्रत का वर्णन करूँगा। वह व्रत भोग और मोक्ष देनेवाला है। कार्तिक की चतुर्दशी को निराहार रहकर भगवान् शिव का… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 191 अग्निपुराण – अध्याय 191 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इक्यानबेवाँ अध्याय त्रयोदशी तिथि के व्रत त्रयोदशीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं त्रयोदशी तिथि के व्रत कहता हूँ, जो सब कुछ देने वाले हैं। पहले मैं ‘अनङ्गत्रयोदशी’ के विषय में बतलाता हूँ। पूर्वकाल में अनङ्ग (कामदेव) –… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 190 अग्निपुराण – अध्याय 190 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ नब्बेवाँ अध्याय अखण्डद्वादशी व्रत का वर्णन अखण्डद्वादशीव्रतं अग्निदेव कहते हैं — अब मैं ‘अखण्डद्वादशी’-व्रत के विषय में कहता हूँ, जो समस्त व्रतों की सम्पूर्णता का सम्पादन करने वाली है। मार्गशीर्ष के शुक्लपक्ष की द्वादशी को उपवास करके भगवान्… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 189 अग्निपुराण – अध्याय 189 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ नवासीवाँ अध्याय श्रवण-द्वादशी व्रत का वर्णन श्रवणद्वादशीव्रतम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं भाद्रपदमास के शुक्लपक्ष में किये जानेवाले ‘श्रवणद्वादशी’ व्रत के विषय में कहता हूँ। यह श्रवण नक्षत्र से संयुक्त होनेपर श्रेष्ठ मानी जाती है एवं उपवास… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 188 अग्निपुराण – अध्याय 188 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अठासीवाँ अध्याय द्वादशी तिथि के व्रत द्वादशीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं भोग एवं मोक्षप्रद द्वादशी सम्बन्धी व्रत कहता हूँ । द्वादशी तिथि को मनुष्य रात्रि को एक समय भोजन करे और किसी से कुछ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 187 अग्निपुराण – अध्याय 187 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सतासीवाँ अध्याय एकादशी तिथि के व्रत एकादशीव्रतं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले एकादशी व्रत का वर्णन करूँगा । व्रत करनेवाला दशमी को मांस और मैथुन का परित्याग कर दे एवं भजन… Read More