शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 23 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता तेईसवाँ अध्याय यतिके द्वादशाह – कृत्यका वर्णन, स्कन्द और वामदेवका कैलासपर्वतपर जाना तथा सूतजीके द्वारा इस संहिताका उपसंहार स्कन्दजी बोले – [ वामदेव !] बारहवें दिन प्रातःकाल उठकर श्राद्धकर्ता पुरुष स्नान और नित्यकर्म करके शिवभक्तों, यतियों अथवा शिवके प्रति… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता बाईसवाँ अध्याय यतिके लिये एकादशाह – कृत्यका वर्णन स्कन्दजी बोले – मुनिश्रेष्ठ वामदेव ! यतिका एकादशाह प्राप्त होनेपर जो विधि बतायी गयी है, उसका मैं तुम्हारे स्नेहवश वर्णन करता हूँ । मिट्टीकी वेदी बनाकर उसका सम्मार्जन और उपलेपन करे… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता इक्कीसवाँ अध्याय यतिके अन्त्येष्टिकर्मकी दशाहपर्यन्त विधिका वर्णन वामदेवजी बोले – जो मुक्त यति हैं, उनके शरीरका दाहकर्म नहीं होता। मरनेपर उनके शरीरको गाड़ दिया जाता है, यह मैंने सुना है । मेरे गुरु कार्तिकेय ! आप प्रसन्नतापूर्वक यतियोंके उस… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 20 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता बीसवाँ अध्याय यतियोंके क्षौर – स्नानादिकी विधि तथा अन्य आचारोंका वर्णन सुब्रह्मण्य बोले – हे वामदेव ! हे महामुने ! अब मैं क्षौर तथा स्नानविधि कहता हूँ, जिसके करनेसे यतिकी तत्क्षण परम शुद्धि होती है ॥ १ ॥ हे… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 19 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता उन्नीसवाँ अध्याय महावाक्योंके तात्पर्य तथा योगपट्टविधिका वर्णन सुब्रह्मण्य बोले- अब महावाक्योंको कहता हूँ – १ – प्रज्ञानं ब्रह्म – ब्रह्म उत्कृष्ट ज्ञानस्वरूप अथवा चैतन्यरूप है। (ऐतरेय० ३ । ३ तथा आत्मप्र ० १ ) २- अहं ब्रह्मास्मि — वह… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 18 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता अठारहवाँ अध्याय संन्यासपद्धतिमें शिष्य बनानेकी विधि शौनकजी बोले – [ हे सूतजी !] तब वेदान्त- सारस्वरूप उस परम अद्भुत रहस्यको सुनकर वामदेवने महेश्वरपुत्र कार्तिकेयसे [ और ] क्या पूछा ? शिवज्ञानमें सदा तत्पर रहनेवाले योगी वामदेव धन्य हैं, जिनके… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 17 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता सत्रहवाँ अध्याय अद्वैत शैववाद एवं सृष्टिप्रक्रियाका प्रतिपादन वामदेवजी बोले- हे भगवन्! आपने पहले कहा कि प्रकृतिके नीचे नियति और ऊपर पुरुष है, अब आप अन्यथा कैसे कह रहे हैं ? हे प्रभो ! मायासे जिसका स्वरूप ढका हुआ है,… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 16 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता सोलहवाँ अध्याय शैवदर्शनके अनुसार शिवतत्त्व, जगत्-प्रपंच और जीवतत्त्वके विषयमें विशद विवेचन तथा शिवसे जीव और जगत् कीअभिन्नताका प्रतिपादन सूतजी बोले- गुरुके द्वारा उपदिष्ट वेदार्थको सुनकर मुनिवर वामदेव परमात्मविषयक सन्देहोंको आदरपूर्वक पूछने लगे-॥ १ ॥ वामदेवजी बोले- हे ज्ञानशक्तिके धारक… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 15 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता पन्द्रहवाँ अध्याय तिरोभावादि चक्रों तथा उनके अधिदेवताओं आदिका वर्णन ईश्वर बोले – हे वरानने ! इसके बाद सदाशिवसे जिस प्रकार महेश्वरादि व्यूहचतुष्टयकी उत्पत्ति होती है, उस उत्तम सृष्टि-पद्धतिको मैं कह रहा हूँ ॥ १ ॥ आकाशके अधिपति प्रभु सदाशिव… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 14 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता चौदहवाँ अध्याय शिवस्वरूप प्रणवका वर्णन वामदेव बोले— हे भगवन्! हे षण्मुख ! हे सम्पूर्ण विज्ञानरूपी अमृतके सागर ! हे समस्त देवताओंके स्वामी शिवजीके पुत्र! हे शरणागतोंके दुःखके विनाशक ! आपने कहा कि प्रणवके छ: प्रकारोंके अर्थोंका ज्ञान अभीष्ट प्रदान… Read More