शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 10 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 10 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] दसवाँ अध्याय ब्रह्माण्डकी स्थिति, स्वरूप आदिका वर्णन वायु बोले- पहले ईश्वरकी आज्ञासे पुरुषसे समन्वित अव्यक्तसे बुद्धि आदिसे लेकर विशेषपर्यन्त सभी विकार क्रमशः उत्पन्न हुए ॥ १ ॥ इसके बाद उन्हीं विकारोंसे रुद्र, विष्णु एवं पितामह—ये… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 09 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] नौवाँ अध्याय सृष्टिके पालन एवं प्रलयकर्तृत्वका वर्णन मुनिगण बोले – [ हे वायुदेव ! ] परमात्मा शिव किस प्रकारसे इस सम्पूर्ण जगत्का निर्माणकर पुनः इसे स्थापित करके अपनी शक्तिके साथ उत्तम क्रीड़ा करते हैं? ॥… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 08 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] आठवाँ अध्याय कालका परिमाण एवं त्रिदेवोंके आयुमानका वर्णन ऋषिगण बोले- इस कालमें किस प्रमाणके द्वारा आयु – गणनाकी कल्पना की जाती है और संख्यारूप कालकी परम अवधि क्या है ? ॥ १ ॥ वायुदेव बोले-… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 07 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] सातवाँ अध्याय कालकी महिमाका वर्णन मुनिगण बोले- कालसे ही सब कुछ उत्पन्न होता है और कालसे ही सब कुछ नष्ट हो जाता है । कालके बिना कहीं कुछ भी नहीं होता है ॥ १ ॥… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 06 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] छठा अध्याय महेश्वरकी महत्ताका प्रतिपादन मुनि बोले – [ हे देव! ] आपने पूर्वमें पशु तथा पाशके विषयमें बताया है, अब इन दोनोंसे विलक्षण तथा इनपर शासन करनेवाले किसी [तत्त्व] अर्थात् पशुपतिके विषयमें बताइये ॥… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 05 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] पाँचवाँ अध्याय ऋषियोंके पूछनेपर वायुदेवद्वारा पशु, पाश एवं पशुपतिका तात्त्विक विवेचन सूतजी बोले – हे महाभाग्यवान् ऋषियो ! नैमिषारण्यनिवासी उन ऋषियोंने विधिपूर्वक वायुदेवको प्रणामकर उनसे पहले पूछा ॥ १ ॥ नैमिषारण्यके ऋषियोंने पूछा – देव!… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 04 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] चौथा अध्याय नैमिषारण्यमें दीर्घसत्रके अन्तमें मुनियोंके पास वायुदेवताका आगमन सूतजी बोले – उस समय उत्तम व्रतका पालन करनेवाले महाभाग्यवान् उन ऋषियोंने महादेवका अर्चन करते हुए उस स्थानमें यज्ञानुष्ठान प्रारम्भ किया ॥ १ ॥ उन महर्षियोंका… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 03 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] तीसरा अध्याय ब्रह्माजीके द्वारा परमतत्त्वके रूपमें भगवान् शिवकी महत्ताका प्रतिपादन तथा उनकी आज्ञासे सब मुनियोंका नैमिषारण्यमें आना ब्रह्माजी बोले – मनके साथ वाणी जिनको प्राप्त किये बिना ही लौट आती है, जिनके आनन्दमय स्वरूपको प्राप्तकर… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 02 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] दूसरा अध्याय ऋषियोंका ब्रह्माजीके पास जाकर उनकी स्तुति करके उनसे परमपुरुषके विषयमें प्रश्न करना और ब्रह्माजीका आनन्दमग्न हो ‘रुद्र’ कहकर उत्तर देना सूतजी बोले- पूर्व समयमें अनेक कल्पोंके पुनः- पुनः बीत जानेके बाद जब यह… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 01 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 01 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड ] पहला अध्याय ऋषियोंद्वारा सम्मानित सूतजीके द्वारा कथाका आरम्भ, विद्यास्थानों एवं पुराणोंका परिचय तथा वायुसंहिताका प्रारम्भ नमः शिवाय सोमाय सगणाय ससूनवे । प्रधानपुरुषेशाय सर्गस्थित्यन्तहेतवे ॥ शक्तिरप्रतिमा यस्य ह्यैश्वर्यं चापि सर्वगम् । स्वामित्वं च विभुत्वं च… Read More