शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 30 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 30 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] तीसवाँ अध्याय ऋषियोंका शिवतत्त्वविषयक प्रश्न ऋषिगण बोले— शिवजीके चरित्र अद्भुत, गोपनीय, गहन तथा देवताओंद्वारा भी दुर्विज्ञेय हैं, वे हम सभीके मनको मोहित कर देते हैं ॥ १ ॥ शिव और शिवाके [ विचित्र ] चरित्रोंके… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 29 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 29 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] उनतीसवाँ अध्याय जगत् ‘वाणी और अर्थरूप’ है – इसका प्रतिपादन वायुदेवता कहते हैं— महर्षियो! अब यह बता रहा हूँ कि जगत् की वागर्थात्मकताकी सिद्धि कैसे की गयी है। छः अध्वाओं ( मार्गों ) का सम्यक्… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 28 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 28 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] अट्ठाईसवाँ अध्याय अग्नि और सोमके स्वरूपका विवेचन तथा जगत् की अग्नीषोमात्मकताका प्रतिपादन ऋषियोंने पूछा – प्रभो ! पार्वती देवीका समाधान करते हुए महादेवजीने यह बात क्यों कही कि ‘सम्पूर्ण विश्व अग्नीषोमात्मक एवं वागर्थात्मक है ।… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 27 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 27 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] सत्ताईसवाँ अध्याय मन्दराचलपर गौरीदेवीका स्वागत, महादेवजीके द्वारा उनके और अपने उत्कृष्ट स्वरूप एवं अविच्छेद्य सम्बन्धका प्रकाशन तथा देवीके साथ आये हुए व्याघ्रको उनका गणाध्यक्ष बनाकर अन्तः पुरके द्वारपर सोमनन्दी नामसे प्रतिष्ठित करना ऋषियोंने पूछा- अपने… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 26 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 26 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] छब्बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजीद्वारा दुष्कर्मी बतानेपर भी गौरीदेवीका शरणागत व्याघ्रको त्यागनेसे इनकार करना और माता – पितासे मिलकर मन्दराचलको जाना वायुदेवता कहते हैं— कौशिकीको उत्पन्न करके उसे ब्रह्माजीके हाथमें देनेके पश्चात् गौरी देवीने प्रत्युपकारके लिये पितामहसे… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 25 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 25 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] पच्चीसवाँ अध्याय पार्वतीकी तपस्या, व्याघ्रपर उनकी कृपा, ब्रह्माजीका देवीके साथ वार्तालाप, देवीके द्वारा काली त्वचाका त्याग और उससे उत्पन्न कौशिकीके द्वारा शुम्भ-निशुम्भका वध वायुदेव कहते हैं— महर्षियो ! तदनन्तर पतिव्रता माता पार्वती पतिकी परिक्रमा करके… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 24 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 24 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] चौबीसवाँ अध्याय शिवका तपस्याके लिये मन्दराचलपर गमन, मन्दराचलका वर्णन, शुम्भ-निशुम्भ दैत्यकी उत्पत्ति, ब्रह्माकी प्रार्थनासे उनके वधके लिये शिव और शिवाके विचित्र लीला – प्रपंचका वर्णन तदनन्तर ऋषियोंने पूछा – प्रभो ! अपने गणों तथा देवीके… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 23 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 23 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] तेईसवाँ अध्याय पराजित देवोंके द्वारा की गयी स्तुतिसे प्रसन्न शिवका यज्ञकी सम्पूर्ति करना तथा देवताओंको सान्त्वना देकर अन्तर्धान होना वायुदेव बोले— [हे विप्रवरो ! ] इस प्रकार अस्त्रोंसे छिन्न-भिन्न अंगोंवाले विष्णु आदि देवता क्षणमात्रमें कष्टको प्राप्तकर… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 22 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] बाईसवाँ अध्याय वीरभद्रके पराक्रमका वर्णन वायु बोले – [ हे ब्राह्मणो !] उसी समय आकाशमें एक रथ प्रकट हुआ, जो हजारों सूर्योंके समान, मनोहर वस्त्रमें वृषचिह्नवाली ध्वजासे युक्त, दो [ वेगवान् तथा ] श्रेष्ठ अश्वोंसे युक्त,… Read More
शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [ पूर्वखण्ड] — अध्याय 21 शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] — अध्याय 21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [पूर्वखण्ड] इक्कीसवाँ अध्याय वीरभद्रका दक्षके यज्ञमें आये देवताओंको दण्ड देना तथा दक्षका सिर काटना वायु बोले – [ हे विप्रगण ! ] तब देवताओंमें प्रमुख वे विष्णु, इन्द्रादि उस भयंकर [ वीरभद्र ] – से संत्रस्त हो गये… Read More