श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान-कुरर से लेकर शृंगी तक सात गुरुओं की कथा अवधूत दत्तात्रेयजी ने कहा — राजन् ! मनुष्यों को जो वस्तुएँ अत्यन्त प्रिय लगती हैं, उन्हें इकट्ठा करना ही उनके दुःख का कारण है । जो बुद्धिमान्… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान — अजगर से लेकर पिङ्गला तक नौ गुरुओं की कथा अवधूत दत्तात्रेयजी कहते हैं — राजन् ! प्राणियों को जैसे बिना इच्छा के, बिना किसी प्रयत्न के रोकने की चेष्टा करने पर भी पूर्वकर्मानुसार दुःख… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान — पृथ्वी से लेकर कबूतर तक आठ गुरुओं की कथा भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाभाग्यवान् उद्धव ! तुमने मुझसे जो कुछ कहा है मैं वही करना चाहता हूँ । ब्रह्मा, शङ्कर और इन्द्रादि लोकपाल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय देवताओं की भगवान् से स्वधाम सिधारने के लिये प्रार्थना तथा यादवों को प्रभासक्षेत्र जाने की तैयारी करते देखकर उद्धव का भगवान् के पास आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवर्षि नारद वसुदेवजी को उपदेश… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय भक्तिहीन पुरुषों की गति और भगवान् की पूजाविधि का वर्णन राजा निमि ने पूछा — योगीश्वरो ! आपलोग तो श्रेष्ठ आत्मज्ञानी और भगवान् के परमभक्त हैं । कृपा करके यह बतलाइये कि जिनकी कामनाएँ शान्त नहीं… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय भगवान् के अवतारों का वर्णन राजा निमि ने पूछा — योगीश्वरो ! भगवान् स्वतन्त्रता से अपने भक्तों की भक्ति के वश होकर अनेकों प्रकार के अवतार ग्रहण करते हैं और अनेकों लीलाएँ करते हैं । आपलोग… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय माया, माया से पार होने के उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोग का निरूपण राजा निमि ने पूछा — भगवन् ! सर्वशक्तिमान् परमकारण विष्णुभगवान् की माया बड़े-बड़े मायावियों को भी मोहित कर देती हैं, उसे कोई पहचान… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय वसुदेवजी के पास श्रीनारदजी का आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरों का संवाद सुनाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — कुरुनन्दन ! देवर्षि नारद के मन में भगवान् श्रीकृष्ण की सन्निधि में रहने की बड़ी लालसा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय यदुवंश को ऋषियों का शाप व्यासनन्दन भगवान् श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने बलरामजी तथा अन्य यदुवंशियों के साथ मिलकर बहुत-से दैत्यों का संहार किया तथा कौरव और पाण्डवों में भी शीघ्र मार-काट… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ९० श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ९० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नब्बेवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के लीला-विहार का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! द्वारकानगरी की छटा अलौकिक थी । उसकी सड़कें मद चूते हुए मतवाले हाथियों, सुसज्जित योद्धाओं, घोड़ों और स्वर्णमय रथों की भीड़ से सदा… Read More